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मरवाही से सरकारी रिकॉर्ड में बड़ी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। यहां एक आदिवासी परिवार के जीवित सदस्यों को दस्तावेजों में मृत घोषित कर उनकी करीब 19 एकड़ पुश्तैनी जमीन किसी बाहरी व्यक्ति के नाम कर दी गई। मामले के सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पंचायत, पटवारी और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल किया गया। परिवार के दो भाई, सावन सिंह, दिनेश पेन्द्रों जो आज भी जीवित हैं और खेती-किसानी कर रहे हैं, उन्हें सरकारी फाइलों में मृत दिखा दिया गया। इसके बाद उनकी करोड़ों रुपए कीमत की जमीन का नामांतरण दूसरे जिले के एक अजनबी व्यक्ति के नाम कर दिया गया। फौती नामांतरण कराने पहुंचे तो खुला राज मामले का खुलासा तब हुआ, जब पीड़ित परिवार अपनी जमीन का फौती नामांतरण (मृत्यु के बाद संपत्ति का हस्तांतरण) कराने राजस्व कार्यालय पहुंचा। वहां उन्हें पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड में पूरा परिवार मृत दर्ज है और जमीन पहले ही किसी और के नाम ट्रांसफर की जा चुकी है। परिवार का आरोप है कि इस धोखाधड़ी के लिए नई वंशावली तैयार की गई और फर्जी वारिस खड़े किए गए। पंचायत प्रस्ताव में बताया- परिवार अब दुनिया में नहीं आरोप है कि ग्राम पंचायत में 41 ग्रामीणों की मौजूदगी का दावा करते हुए एक प्रस्ताव भी पारित किया गया, जिसमें लिखा गया कि संबंधित परिवार अब जीवित नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बिना मुनादी और सत्यापन के ऐसा प्रस्ताव कैसे पारित हो गया। साथ ही पटवारी ने बिना जांच किए आगे की कार्रवाई कैसे कर दी। कलेक्टर से शिकायत, जांच की मांग पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की शिकायत कलेक्टर कार्यालय में की है। परिवार का कहना है कि उनकी जमीन हड़पने के लिए सुनियोजित साजिश रची गई। इस मामले में पंचायत, पटवारी और भू-माफिया की मिलीभगत के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, मामले में संबंधित अधिकारी और कर्मचारी फिलहाल कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे हैं। सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित किए गए बुजुर्ग मानसिंह ने भी सामने आकर अपनी आपबीती सुनाई। उनका कहना है कि वे जिंदा हैं, फिर भी कागजों में उन्हें मृत बता दिया गया।
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मरवाही में जिंदा लोगों को कागजों में किया मृत:करोड़ों की 19 एकड़ जमीन बाहरी लोगों के नाम, नई वंशावली और फर्जी वारिस खड़े किए














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