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बेरमो कोयलांचल में कोयला चोरी थमने का नाम नहीं ले रह है। पुलिस, सीआईएसएफ और सीसीएल सुरक्षा विभाग की दबिश के बाद तस्करों ने अपना तरीका बदल लिया है। अब दिन के बजाय आधी रात के बाद जारंगडीह खुली खदान, कथारा कोलियरी और जारंगडीह रेलवे साइडिंग से बड़े पैमाने पर कोयला निकाला जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार रात 12 बजे के बाद आसपास के गांवों से महिलाएं, पुरुष और किशोर समूह बनाकर कोलियरियों की ओर पहुंचते हैं। महिलाएं सिर और कंधे पर बोरी में कोयला ढोती हैं, जबकि पुरुष साइकिल और बाइक के जरिए कोयला बाहर निकालते हैं। यह सिलसिला सुबह 4 बजे तक चलता है। हैरानी की बात यह है कि जिन इलाकों से कोयला चोरी हो रही है, वहां सीआईएसएफ, होमगार्ड और सीसीएल सुरक्षा कर्मियों की तैनाती रहती है। इसके बावजूद रेलवे साइडिंग और स्टॉक एरिया से कोयला बाहर निकल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के अंधेरे और सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी का फायदा उठाकर तस्कर लगातार नेटवर्क चला रहे हैं। महिलाएं आगे, पीछे बाइक-साइकिल गिरोह… चलता है स्थानीय लोगों के मुताबिक अब तस्करों ने नया तरीका अपनाया है। सबसे आगे महिलाएं बोरी में कोयला लेकर निकलती हैं ताकि शक कम हो। उनके पीछे साइकिल और बाइक गिरोह चलता है, जो तेजी से कोयला सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाता है। कई बार रात में गांवों की गलियों से गुजरती कोयले से लदी साइकिलों की कतारें साफ देखी जाती हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से तस्करों का मनोबल बढ़ा हुआ है। 2 किमी तक फैला स्टॉक एरिया, गार्ड कम होने से मुश्किल सीसीएल सूत्रों के अनुसार कई जगहों पर कोयला स्टॉक और साइडिंग का क्षेत्रफल करीब 2 किलोमीटर तक फैला हुआ है। इतने बड़े इलाके की निगरानी सीमित संख्या में तैनात गार्डों के भरोसे होती है। रात में कई हिस्से अंधेरे में डूबे रहते हैं। इसी का फायदा उठाकर तस्कर अलग-अलग रास्तों से अंदर घुसते हैं और कोयला बाहर निकाल लेते हैं। जारंगडीह रेलवे साइडिंग पर रैक से उतारा गया कोयला। सूत्रों के मुताबिक चोरी का कोयला पहले जंगल और झाड़ियों के बीच बने अस्थायी डिपो तक पहुंचाया जाता है। वहां से छोटे वाहनों के जरिए इसे अलग-अलग इलाकों में भेजा जाता है। कई जगहों पर भट्टों और अवैध कारोबारियों तक भी इसकी सप्लाई होने की चर्चा है। दैनिक भास्कर में लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद कई बार पुलिस और सीआईएसएफ ने संयुक्त छापेमारी की, लेकिन कार्रवाई कुछ दिनों तक सीमित रह जाती है। दबाव कम होते ही फिर से रात के अंधेरे में कोयला चोरी शुरू हो जाती है। भट्ठों और अवैध कारोबारियों तक होती है सप्लाई
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सुरक्षा गार्ड की निगरानी के बावजूद बेरमो में धड़ल्ले से हो रही कोयला चोरी













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