किसान खाद-बीज की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे:धमतरी में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर कालाबाजारी पर रोक लगाने की मांग




धमतरी जिले में खरीफ सीजन से पहले खाद और बीज की समस्या को लेकर किसान यूनियन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में किसान सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे। किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर पर्याप्त खाद-बीज उपलब्ध कराने और कालाबाजारी रोकने की मांग की। किसानों ने ज्ञापन में बताया कि सोसायटियों में पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज उपलब्ध नहीं है। मजबूरी में किसानों को खुले बाजार से ऊंचे दाम पर खाद खरीदना पड़ रहा है। साथ ही नकली खाद और बीज बिकने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। “एक बोरी में कैसे होगी खेती:किसान नेता किसान नेता घनाराम साहू ने कहा कि वर्तमान में प्रति एकड़ सिर्फ एक बोरी यूरिया और एक बोरी डीएपी देने की सीमा तय कर दी गई है, जो खेती के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले प्रति एकड़ दो बोरी यूरिया और दो बोरी डीएपी मिलती थी। सीमा घटाने से धान उत्पादन प्रभावित होगा, क्योंकि एक एकड़ खेत में दो बोरी से ज्यादा खाद की जरूरत पड़ती है। “कंडेल से शुरू हुआ था नहर सत्याग्रह” घनाराम साहू ने कहा कि धमतरी जिले के कंडेल गांव से ही नहर सत्याग्रह की शुरुआत हुई थी और अब उसी क्षेत्र के किसान अपने हक के लिए आवाज उठा रहे हैं। राइस मिलों में भी सरकारी दर पर खाद देने की मांग किसानों ने मांग की कि पहले की तरह किसान राइस मिलों में भी सरकारी दर पर खाद उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना है कि व्यावसायिक बैंकों से ऋण लेने वाले किसानों को सोसायटी से खाद नहीं मिल पाता, जिससे उन्हें महंगे दाम पर बाजार से खरीदना पड़ता है। नहर मरम्मत और जल निकासी की भी मांग ज्ञापन में बारिश से पहले नहरों और बांधों की मरम्मत कराने तथा वार्ड और ग्राम पंचायत स्तर पर जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी शामिल रही। कलेक्टर बोले- “खाद की कमी नहीं,ऑर्गेनिक खेती को कर रहे प्रमोट” अविनाश मिश्रा ने कहा कि इस बार खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर यह तय किया गया है कि किस सोसायटी में कितनी खाद की जरूरत है। उन्होंने कहा कि रासायनिक खाद का अत्यधिक उपयोग खेतों की उर्वरता कम कर रहा है और स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल रहा है। कलेक्टर ने किसानों से जरूरत के अनुसार ही रासायनिक खाद इस्तेमाल करने और ज्यादा से ज्यादा जैविक एवं गोबर खाद अपनाने की अपील की।



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