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जय मां काली जगदंबा ट्रस्ट मणिटोला, डोरंडा का तीन दिवसीय बड़ा पूजा महोत्सव की शुरुआत 15 मई से होगी। 17 मई को पहली बार मां काली की आरती बनारस की तर्ज पर होगी। इसके लिए 7 पुरोहित बनारस से आ रहे हैं। आयोजन को लेकर तैयारियां जोर-शोर से की जा रही हैं। मंदिर और मां के दरबार को भव्य सजाने के लिए बंगाल, बेंगलुरु व हैदराबाद से कार्नेशन, जलवीरा, ऑर्किड, सूरजमुखी और गुलाब, गेंदा जैसे खास 4000 किलो फूल मंगवाए गए हैं। 500 कुड़ी गेंदा फूल का मंगाया जा रहा है। सभी फूल समिति के सदस्य खुद बंगाल जाकर लाएंगे। मां के दरबार के साथ मंदिर को ताजे फलों और फूलों से सजाया जाएगा। ट्रस्ट के सचिव पवन पासवान ने बताया कि 15 दिन पहले से ही बंगाल के कारीगर पूजा पंडाल बनाने में जुटे हैं। मंदिर की साज-सज्जा के लिए बंगाल से 7 और माता रानी के शृंगार के लिए रांची के स्थानीय 10 कारीगर लगे हैं। 15 मई को शाम 5 बजे से भव्य शोभायात्रा मंदिर से निकाली जाएगी। इसमें सरायकेला-खरसावां के बड़े नगाड़े पहली बार आकर्षण का केंद्र बनेंगे। रांची की ताशा पार्टी, बंगाल से ढाक व झारखंड के ढोल-नगाड़े शामिल होंगे।
मुकुंद नायक की टीम 51 ढोल-नगाड़ों के साथ शामिल होगी। शोभायात्रा में 100 पुरुष झंडे लेकर और महिलाएं शृंगार की टोकरी लेकर चलेंगी। इससे पूर्व सुबह में मां काली की पूजा होगी। 16 मई को सुबह 3 बजे से रात 11 बजे तक पूजा-अर्चना होगी। माता रानी को 224 प्रकार के मिष्ठान का भोग लगेगा। मां के दर्शन के लिए जापान, यूपी, नागपुर, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार, बंगाल, ओडिशा, दिल्ली समेत अन्य राज्यों से सवा लाख श्रद्धालु पहुंचेंगे। इसी दिन महाभंडारा होगा। 17 मई को शाम 4 से रात 10 बजे तक माता का भव्य जागरण किया जाएगा। 10 दिनों से मंदिर प्रांगण में गांव की बेटियों द्वारा माता रानी की चुनरी बनाई जा रही है। यह परंपरा 15 सालों से चली आ रही है। चुनरी बाजार से नहीं खरीदी जाती है। कन्याओं की हाथों से बनी चुनरी माता को अर्पित की जाती है। शृंगार के सामान भी गांव की महिलाएं खुद तैयार करती हैं। ससुराल से बेटियों को मोहल्ले के लोग विशेष रूप से आमंत्रित करते हैं।
मौसम को देखते हुए इस साल मंदिर मार्ग से 500 मीटर तक वाटरप्रूफ भव्य पंडाल बनाए जा रहे हैं। दर्शन के दौरान लंबी कतार होने के कारण महिलाओं की परेशानी को देखते हुए बैठने की व्यवस्था की गई है। चंदननगर द्वारा भव्य लाइट गेट बनाया जा रहा है। कुल 70 तोरण द्वार बनाए जा रहे हैं। लाइटिंग में समुद्र मंथन के दौरान विषपान करते बाबा भोलेनाथ और नंदी की सवारी करते उनके दिव्य रूप का श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे। महोत्सव में 700 स्वंयसेवक तैनात रहेंगे। 2 किमी. तक भव्य लाइटिंग की जा रही है।
मंगलवार को मां काली की पूजा कर भोग लगाया गया। मंदिर के मुख्य पुजारी रामेश्वर पासवान बताते हैं कि बड़ा पूजा का इंतजार मां के भक्त एक वर्ष तक करते हैं। मां मनोकामना काली मंदिर एक विशेष आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से मां की आराधना करते हैं उनकी मनोकामना मां काली पूर्ण करती हैं। मंदिर 1953 में बनी और 1978 से बड़ा पूजा महोत्सव की शुरुआत हुई। बड़ा पूजा महोत्सव में हजारों की संख्या में भक्त शामिल होते हैं। 15 मई को माता रानी को हलुआ, पूड़ी, चना, खीर आदि का भोग लगाया जाएगा। 16 को खिचड़ी व सब्जी का भोग लगाया जाएगा। इसके लिए सवा लाख दोना की व्यवस्था की गई है। शिविर में शीतल पेय जल, नींबू पानी, आम पानी, शरबत, रसना आदि की व्यवस्था की गई है।












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