बोत्सवाना की 5 मादा चीता को जंगल में छोड़ा:कूनो में 3 पीढ़ियों के चीते एक साथ मौजूद; खुले जंगल में होगा प्राकृतिक वंशवृद्धि




कूनो नेशनल पार्क में चीता परियोजना के नए चरण में प्रवेश कर गई है। केजीपी-12 के चार शावकों की मौत के तीन दिन बाद, पार्क प्रबंधन ने चीतों को जंगल में छोड़ा। 11 से 15 मई के बीच बोत्सवाना से लाई गई पांच मादा चीतों को खुले जंगल में छोड़ दिया। इस कदम के साथ, कूनो के खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण करने वाले चीतों की कुल संख्या 16 हो गई है, जिनमें नौ मादाएं शामिल हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, जंगल में मादा चीतों की संख्या बढ़ने से नर चीतों का बाहरी क्षेत्रों की ओर भटकाव कम होगा। इससे वे कूनो के भीतर ही अपनी सीमाएं निर्धारित कर स्थायी रूप से रहना शुरू करेंगे। कूनो में तीन पीढ़ियों के चीते मौजूद हैं पार्क प्रबंधन अब बाड़ों में सीमित प्रजनन मॉडल से आगे बढ़कर खुले जंगल में प्राकृतिक वंशवृद्धि की रणनीति पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य चीता आबादी की प्राकृतिक वृद्धि सुनिश्चित करना है। कूनो में अब नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना मूल के चीते मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अलग-अलग देशों के चीतों के प्राकृतिक मिलन से तैयार होने वाली नई पीढ़ी आनुवंशिक रूप से अधिक मजबूत होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, विविध जींस वाले चीतों की संतानों में संक्रमण और आनुवंशिक बीमारियों से लड़ने की क्षमता अधिक होती है, जिससे उनकी उत्तरजीविता दर बेहतर होगी। पार्क में इस समय तीन पीढ़ियों के चीते एक साथ मौजूद हैं। इनमें विदेशों से लाए गए वयस्क चीते, भारत में जन्मे युवा चीते और मां के साथ शिकार सीख रहे किशोर शावक शामिल हैं। अब कूनो में कुल 50 चीते वन अधिकारियों के मुताबिक, यह किसी भी जंगल में स्थायी चीता आबादी बनने की शुरुआती और महत्वपूर्ण स्थिति मानी जाती है, जो परियोजना की सफलता के लिए एक सकारात्मक संकेत है। वर्तमान में कूनो में कुल 50 चीते हैं। इनमें 16 खुले जंगल में विचरण कर रहे हैं, जबकि 34 चीते अभी सुरक्षित बाड़ों में रखे गए हैं। बाड़ों में मौजूद चीतों में 22 छोटे शावक भी शामिल हैं। जंगल में छोड़े गए सभी चीतों की निगरानी रेडियो कॉलर और विशेष फील्ड टीमों के जरिए चौबीसों घंटे की जा रही है। हालांकि अब प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती मानसून का मौसम होगा। बारिश के दौरान जंगलों में नमी, संक्रमण और जलभराव का खतरा बढ़ जाएगा। घनी वनस्पति के कारण चीतों की शिकार क्षमता और आवाजाही प्रभावित हो सकती है। साथ ही तेंदुओं के साथ संघर्ष की आशंका भी बनी रहेगी, जिससे किशोर चीतों की सुरक्षा सबसे बड़ी परीक्षा मानी जा रही है। कूनो में पहली बार खुले जंगल में जन्मे शावक मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क मे 11 अप्रैल को करीब 25 महीने की भारतीय मूल की मादा चीता KGP-2 ने जंगल में 4 शावकों को जन्म दिया था । कूनो नेशनल पार्क में चल रही चीता संरक्षण परियोजना को यह एक बड़ी सफलता मिली थी। क्योंकि यह पहली बार है, जब किसी चीता ने प्राकृतिक जंगल वातावरण में शावकों को जन्म दिया है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि यह किसी भारतीय मूल की मादा चीता की पहली सफल प्रसूति मानी जा रही है। जो इस बात का सबूत है कि यहां का वातावरण चीतों के लिए बिल्कुल सही है। वन्यजीव और प्रकृति संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास सफल हो रहे हैं। चीतों के लिए अनुकूल हुआ जंगल वातावरण अब मध्यप्रदेश चीतों के ‘पुनरुद्धार’ का भी मुख्य केंद्र बन रहा है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मादा चीता KGP-2 पिछले एक साल से अधिक समय से खुले जंगल में रह रही थी। वह प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप पूरी तरह ढल चुकी थी। जंगल में शावकों का जन्म इस बात का संकेत है कि कूनो का पर्यावरण अब चीतों के लिए अनुकूल साबित हो रहा है और वे यहां सुरक्षित रूप से प्रजनन कर पा रहे हैं। सीसीएफ ने परियोजना को बताया बड़ा कदम मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) उत्तम कुमार शर्मा ने कहा कि यह सफलता परियोजना के मुख्य उद्देश्य की दिशा में एक बड़ा कदम था। इस परियोजना का उद्देश्य चीतों को प्राकृतिक वातावरण में स्थापित करना और उनके प्रजनन को सुनिश्चित करना है।



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