“मुसलमान न कभी झुका है और न कभी झुकेगा”:मौलाना अरशद मदनी बोले–संविधान के अधिकार कोई सरकार नहीं छीन सकती, मस्जिदों, मकबरों और मदरसों को अवैध बताकर गिराया जा रहा




जमीयत उलमा-ए-हिंद की कार्यसमिति का दो दिवसीय अधिवेशन में अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि देश में अब नफरत की राजनीति की जगह डर और धमकी की राजनीति ने ले ली है और मुसलमानों को यह एहसास दिलाने की कोशिश की जा रही है कि उन्हें अब शर्तों के साथ जीवन बिताना होगा। मदनी बोले- पहले की सरकारों ने मुसलमानों को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन वर्तमान सरकार इस्लाम को नुकसान पहुंचाना चाहती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद बने कई कानून इस बात का प्रमाण हैं कि अब केवल मुसलमान ही नहीं बल्कि इस्लाम भी निशाने पर है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को अधिकार किसी सरकार ने नहीं बल्कि संविधान ने दिए हैं और जब तक संविधान कायम है, मुसलमान इस देश में सम्मान के साथ रहेंगे। उन्होंने दो टूक कहा कि “मुसलमान न कभी झुका है और न कभी झुकेगा। वह प्रेम और सद्भाव से झुक सकता है, लेकिन ताकत के बल पर उसे कभी नहीं झुकाया जा सकता।” मौलाना मदनी ने हाल ही में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल और असम में खुलेआम चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हुआ और मुसलमानों को सार्वजनिक रूप से धमकियां दी गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के बाद भी यह सिलसिला जारी है। उन्होंने कहा कि यदि कोई मुख्यमंत्री यह कहता है कि “मुसलमानों ने हमें वोट नहीं दिया इसलिए हम उनका काम नहीं करेंगे”, तो यह संविधान और लोकतंत्र दोनों का अपमान है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र हर नागरिक को अपनी पसंद का नेता चुनने का अधिकार देता है और किसी दल को वोट न देना कोई अपराध नहीं है। वंदे मातरम् और यूसीसी पर भी जताया विरोध कहा- धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ है अनिवार्यता जमीयत ने केंद्र सरकार के उस निर्णय का विरोध किया जिसमें वंदे मातरम् को राष्ट्रगान जन गण मन के समान दर्जा देने और सरकारी व शैक्षणिक संस्थानों में इसे अनिवार्य किए जाने की बात कही गई है। मौलाना मदनी ने कहा कि यह संविधान की मूल भावना और धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार यह निर्णय वापस नहीं लेती तो जमीयत अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। साथ ही समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के खिलाफ भी कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कही। मुसलमानों से दस्तावेज संभालकर रखने की अपील मौलाना मदनी ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह केवल मतदाता सूची सुधार अभियान नहीं बल्कि एनआरसी जैसी प्रक्रिया है, जिसके जरिए मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में 27 लाख मतदाताओं को संदिग्ध घोषित किए जाने का हवाला देते हुए इसे लोकतंत्र पर काला धब्बा बताया। उन्होंने मुसलमानों से सभी जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखने और एसआईआर फॉर्म सावधानी से भरने की अपील की। साथ ही कहा कि जमीयत के कार्यकर्ता लोगों की हरसंभव मदद करेंगे। मौलाना मदनी ने आरोप लगाया कि मस्जिदों, मकबरों और मदरसों को अवैध बताकर गिराया जा रहा है और मदरसों के खिलाफ लगातार नए आदेश जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जमीयत इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रही है और कई मामलों में अदालतों से राहत भी मिली है। इस दौरान उन्होंने घोषणा की कि जमीयत उलमा-ए-हिंद जल्द ही केंद्रीय और प्रांतीय स्तर पर मदरसा बोर्ड गठित करेगी, ताकि मदरसों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए सामूहिक प्रयास किए जा सकें। मौलाना मदनी ने कहा कि इस्लाम एक आसमानी धर्म है और उसे मिटाने वाले खुद मिट गए, लेकिन इस्लाम हमेशा कायम रहा। उन्होंने पूर्व सोवियत रूस का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां वर्षों तक इस्लाम को खत्म करने की कोशिश की गई, लेकिन अंत में सोवियत रूस टूट गया और इस्लाम कायम रहा। उन्होंने कहा कि भारत का मुसलमान देशभक्त नागरिक है और देश की प्रगति में बराबर का सहभागी है। हर कठिन समय में मुसलमानों ने अपनी देशभक्ति साबित की है। अधिवेशन के अंत में मौलाना मदनी ने देश की सभी न्यायप्रिय शक्तियों और नागरिकों से अपील की कि वे नफरत और उग्रवाद की राजनीति के खिलाफ एकजुट हों तथा देश में भाईचारा, सहिष्णुता और न्याय कायम रखने के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि भारत सभी नागरिकों का देश है और किसी भी वर्ग के साथ अन्याय स्वीकार नहीं किया जा सकता।



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