90 साल के सफर को रागों की अंजलि… सितार व सरोद की जुगलबंदी से सीधे रूह में उतर गए सुर




दूरदर्शन केंद्र का सभागार सुर, ताल व लय की त्रिवेणी से चमक रहा था। केडिया बंधुओं के नाम से विख्यात, देश के सुप्रसिद्ध सितार वादक पंडित मोर मुकुट केडिया व सरोद वादक मनोज कुमार केडिया ने जैसे ही राग-रागिनियों की सरिता को प्रवाहित करना शुरू किया। जेठ की तपती दोपहरी में बारिश की बूंदों-सा अहसास हुआ। आकाशवाणी के 90 वर्ष पूर्ण होने पर ‘रागांजलि’ कार्यक्रम में सितार व सरोद की गूंज ने महफिल को रूहानी बना दिया। दोनों परिपक्व उस्तादों का साथ देने तबले पर युवा तबला वादक श्रीजीत चटर्जी के आसन ग्रहण करते ही तालियों की गूंज से स्टूडियो में संगीत का जादू बिखरने लगा। ‘केडिया बंधु’ सेनिया मेहर घराने की अनमोल विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। पिछले 50 वर्षों से अनवरत जुगलबंदी कर रहे हैं। दोनों अमेरिका, जर्मनी, लंदन और चीन सहित विश्व के अनेक देशों में कार्यक्रम प्रस्तुत कर चुके हैं। पहली प्रस्तुति राग चन्द्रनन्दन (विलम्बित व द्रुत तीनताल) में जैसे ही केडिया बंधुओं ने सितार व सरोद बजाना शुरू किया। रहस्यमयी और चन्द्रमा-सी शीतल सर्जना ने ग्रीष्म ऋतु में चंद्रमा की शीतलता प्रदान करते हुए आनंद की अनुभूति कराने लगा। महान सरोद वादक उस्ताद अली अकबर खान साहब द्वारा रचित, यह राग शांत रस प्रधान है, जिसमें वैराग्य व आत्मानन्द का मिश्रण है। यह राग मालकौंस, चन्द्रकौंस आदि रागों के स्वाद को समेटते हुए भी एक अनोखी शांति और आध्यात्मिक आनंद प्रदान कर रहा था। लोगों की तालियों के बीच दूसरी प्रस्तुति राग मिश्र पीलू (दादरा व तीनताल) में हुई। राग चन्द्रनन्दन की गहन शांति के बाद भावों की बहार और शृंगार की चंचलता से ओतप्रोत इस राग में मधुर पीड़ा और आनंद महसूस हुआ। लगा जैसे नायिका यहां विरहिणी है, जो अपने नायक की प्रतीक्षा में व्याकुल है। कभी वह सज-संवरकर मिलन की आशा में द्वार पर खड़ी है, तो कभी बिछुड़े प्रियतम की याद में आंसू बहाती है। स्टेज के बैकड्रॉप में मेघों से घिरा आकाश, बरसात की पहली फुहार, झूमती लताएं, नायिका के कजरारी नैन व हृदय की धड़कन दिख रहे थे जिससे सभी बिंब पीलू में जीवंत हो उठते हैं। मुरकी, खटका, मींड और गमक ठीक उसी तरह हृदय को छू रहे थे, जैसे प्रेम की पहली बूंद। तीसरी प्रस्तुति मिश्र खम्बाज में भजन से हुआ। खम्बाज के शृंगार में विरह प्रधान धुन सुनाई पड़ी। भक्ति के साथ जुड़कर यह भक्ति-शृंगार में परिवर्तित हो गई। लगा जैसे राधा अपने नायक श्रीकृष्ण से मिलन की लालसा में गुनगुना रही हो। यहां विरह की पीड़ा और मिलन की मधुर आशा दोनों एक साथ हृदय को स्पर्श कर रही थी। बैकड्रॉप में यमुना का किनारा, मधुर वंशी की ध्वनि, चांदनी रात में फूलों की वर्षा, प्रेमी-प्रेमिका का मिलन-विरह, भक्ति की आंसू भरी पलकें और अंत में पूर्ण समर्पण नजर आया। आकाशवाणी भारतीय संस्कृति का सच्चा साथी इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पद्मश्री मधु मंसूरी हंसमुख, आकाशवाणी रांची के केंद्र प्रमुख दुर्गा चरण हेंब्रम, कार्यक्रम प्रमुख जेवियर कंडुलना व दूरदर्शन के कार्यक्रम प्रमुख अमित कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। दुर्गा चरण हेंब्रम ने बताया कि नौ दशकों में आकाशवाणी केवल एक रेडियो स्टेशन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति व सूचना का सबसे विश्वसनीय साथी रही है। मीडियम वेव और शॉर्ट वेव से शुरुआत के बाद आज एफएम गोल्ड, एफएम रेनबो व न्यूज ऑन एअर एप के माध्यम से आकाशवाणी पूरी दुनिया की मुट्ठी में है। तकनीक बदली है, गुणवत्ता बढ़ी है, लेकिन हमारा उद्देश्य आज भी वही है- ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’। संचालन रचना रौनियार ने किया। रूपरेखा कार्यक्रम अधिशासी प्रभु शरण व सूचना अधिकारी राजेश करमहे ने तैयार की थी। जेठ की दोपहरी में बरसीं सुरों की बूंदें



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