वकीलों पर लाठीचार्ज के विरोध में बरेली में फूटा आक्रोश:कलेक्ट्रेट में वकीलों ने सरकार को दी बड़े आंदोलन की चेतावनी, तोड़े गए चैंबरों को दोबारा बनाने की उठाई मांग




लखनऊ में वकीलों के चैंबरों पर बुलडोजर कार्रवाई और उसके बाद हुए लाठीचार्ज के विरोध में आज बरेली के वकीलों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। भारी संख्या में अधिवक्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रदर्शन किया। वकील न झुका है, न डरा है प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यह अधिवक्ताओं की आवाज को दबाने की एक सोची-समझी रणनीति है। वकीलों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि पुलिस के लाठी-डंडे और वर्दी का रौब दिखाकर वकीलों को डराया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि देश में जब भी सत्ता या शासन बेलगाम हुआ है, वकीलों ने हमेशा मुखर होकर उसका विरोध किया है। चैंबर तोड़े जाने पर आक्रोश, पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह का दिया हवाला अधिवक्ताओं ने कहा कि उनके पास बैठने के लिए पर्याप्त जगह और चैंबर नहीं हैं। लखनऊ में जब वकीलों ने अपने बैठने की व्यवस्था की, तो प्रशासन ने उस पर बुलडोजर चला दिया और विरोध करने पर निर्मम तरीके से लाठीचार्ज किया। वकीलों ने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में बरेली बार सहित पूरे प्रदेश में वकीलों के बैठने के लिए बिल्डिंग और चैंबर बनाने के लिए फंड दिया था। उन्होंने मांग की कि वर्तमान सरकार भी वकीलों के टूटे हुए चैंबरों को दोबारा बनवाकर उनके बैठने की उचित व्यवस्था करे। बड़े आंदोलन और जेल भरो की दी चेतावनी वकीलों ने शासन-प्रशासन को स्पष्ट लहजे में कहा कि वे इस मामले में सरकार से कोई आग्रह नहीं, बल्कि सीधे तौर पर चेतावनी दे रहे हैं। अगर वकीलों के बैठने की उचित व्यवस्था नहीं की गई और पुलिस की ये ज्यादतियां नहीं रुकीं, तो बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के साथ मिलकर पूरे देश और प्रदेश में एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। वकीलों ने कहा कि वे जेल जाने और गिरफ्तारियों से डरने वाले नहीं हैं, और अपनी मांगों को लेकर यह लड़ाई जारी रखेंगे।



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