मंत्री पद छोड़ने वाले स्ट्रीटिंग अब पीएम की दौड़ में:स्वास्थ्य मंत्री पद से इस्तीफा, 2018 में किया था 10 साल बाद प्रधानमंत्री बनने का दावा




ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के नेतृत्व पर भरोसा खत्म होने का हवाला देते हुए हाल ही में इस्तीफा दे दिया। पत्र में उन्होंने कहा कि स्टारमर लेबर पार्टी को अगला चुनाव नहीं जिता पाएंगे। इसे स्ट्रीटिंग की प्रधानमंत्री पद की महत्वाकांक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। वेस स्ट्रीटिंग को ब्रिटिश राजनीति का बेहद चतुर खिलाड़ी माना जाता है। विश्लेषक डेविड जेफरी बताते हैं कि स्ट्रीटिंग लंबे समय से पीएम बनने की इच्छा रखते रहे हैं। साल 2018 के एक शो में उन्होंने 10 साल बाद खुद को प्रधानमंत्री तक बताया था। अब वे अपने उस दावे को हकीकत में बदलने के बेहद करीब दिख रहे हैं। स्ट्रीटिंग खुद को एक आम राजनेता नहीं मानते। उनका जीवन बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। टावर हैमलेट्स के गरीब कामकाजी परिवार से आने वाले स्ट्रीटिंग ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए दुकानों में नौकरियां कीं। उन्होंने अपनी 2023 की किताब ‘वन बॉय, टू बिल्स एंड अ फ्राय अप’ में खुलासा किया था कि उनके दादा हथियारबंद लूट के मामले में जेल जा चुके थे। उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के सेल्विन कॉलेज से इतिहास की पढ़ाई की और 2015 में पहली बार सांसद बने। डॉक्टरों से रहा टकराव: स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर वेस स्ट्रीटिंग का ट्रैक रिकॉर्ड मजबूत है। उन्होंने मार्च 2026 तक 65% मरीजों का इलाज 18 हफ्तों के भीतर कराने का लक्ष्य रखा और ब्रिटेन की सरकारी स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) की वेटिंग लिस्ट में 17 साल की सबसे बड़ी कटौती दर्ज की। हालांकि डॉक्टरों की हड़तालों के चलते वे पार्टी के वामपंथी धड़े के निशाने पर भी रहे। लेबर पार्टी का नेतृत्व पाने के लिए उन्हें इसी वामपंथी सदस्यता का समर्थन जुटाना होगा, जिसे पीएम स्टारमर से भी ज्यादा कट्टर माना जाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से रहा है छत्तीस का आंकड़ा अगर स्ट्रीटिंग ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बनते हैं, तो लंदन-वॉशिंगटन रिश्तों पर नजर रहेगी, क्योंकि वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के मुखर आलोचक रहे हैं। ट्रम्प के पहले कार्यकाल (2017-2021) में स्ट्रीटिंग ने उन्हें ‘घिनौना’ शख्स तक कहा था। इसी तरह, गर्भावस्था में पैरासिटामोल और ऑटिज्म वाले ट्रम्प के दावे पर स्ट्रीटिंग ने कह चुके हैं कि लोग ‘ट्रम्प की फिजूल बातों’ के बजाय ब्रिटिश डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की सुनें।



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