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राज्य के विश्वविद्यालयों के कॉलेजों में क्लस्टर सिस्टम लागू करने के बाद शुरू हुआ विरोध-प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है। टीचर्स-स टूडेंट्स का कहना है कि विश्वविद्यालयों के एकेडमिक काउंसिल, सिंडिकेट और सीनेट जैसी सर्वोच्च अकादमिक और वैधानिक संस्थाओं की स्वीकृति लिए बिना ही बड़े बदलाव का फैसला लिया गया है। इतने बड़े स्तर पर बदलाव से पहले यूनिवर्सिटी स्तर की सर्वोच्च संस्थानों में मंथन जरूरी था, जिसकी अनदेखी की गई है। इनका कहना है कि छात्रों की पढ़ाई, विषय चयन व्यवस्था और कॉलेजों की संरचना से जुड़े इतने बड़े फैसले पर पहले विश्वविद्यालयों के वैधानिक निकायों में व्यापक चर्चा और सहमति होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा किए बिना ही बदलाव की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं। रांची| झारखंड में विश्वविद्यालयों के अंगीभूत कॉलेजों में लागू किए जाने वाले क्लस्टर सिस्टम के विरोध में सोमवार को धरना-प्रदर्शन किया। डोरंडा कॉलेज के छात्रों ने कॉलेज के मुख्य द्वार के बाहर क्लस्टर सिस्टम के विरोध में धरना पर बैठ गए और वापस लेने की डिमांड के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। इससे सड़क जाम हो गई, जिससे लोगों को परेशानी भी हुई। आईसा के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर शिक्षा के व्यावसायीकरण और सरकारी उच्च शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। छात्रों ने क्लस्टर सिस्टम, पद सरेंडर के खिलाफ नारेबाजी की। छात्रों का कहना था कि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने पर गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्र उच्च शिक्षा से वंचित हो जाएंगे। आइसा के राज्य सचिव त्रिलोकी नाथ ने कहा कि क्लस्टर प्रणाली को फंडिंग से जोड़कर राज्य के अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है। इस व्यवस्था के लागू होने पर छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को अपने मूल कॉलेज से दूसरे परिसरों में जाना पड़ेगा, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ेगा और सुविधाओं की समस्या पैदा होगी। जिला अध्यक्ष विजय कुमार, जिला सचिव संजना मेहता ने विचार रखे। विश्वविद्यालय के शिक्षकों और छात्रों में इस बात को लेकर चिंता बढ़ रही है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत अभी विश्वविद्यालयों में मल्टी-डिसिप्लिनरी शिक्षा मॉडल लागू है। इसमें छात्रों को विभिन्न विषयों के चयन की स्वतंत्रता दी गई है। लेकिन क्लस्टर सिस्टम में कॉलेजों को संकाय आधारित इकाइयों में विभाजित किए गए हैं। ऐसे में एक कॉलेज में एक ही स्ट्रीम के अंतर्गत के विषयों की पढ़ाई होने से छात्रों के विषय चयन की आजादी प्रभावित हो सकती है। इधर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की पहल पर 21 और 22 मई को राजधानी के एक होटल में बैठक आयोजित होने जा रही है। इसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति और प्राचार्य शामिल होंगे। बैठक में क्लस्टर सिस्टम, कॉलेजों के पुनर्गठन, संसाधनों के साझा उपयोग और विश्वविद्यालयी ढांचे में हुए बदलाव को लागू करने को लेकर विस्तार से मंथन होगा। इस बैठक पर अधिकारियों, शिक्षकों और छात्रों की नजरें िटकी हैं।
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क्लस्टर सिस्टम: बदलाव से पहले सिंडिकेट व सीनेट से नहीं ली स्वीकृति, अब हो रहा विरोध











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