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महाकाल मंदिर के पास पार्किंग की जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जमीन को पहले निजी बनाया फिर उसका सौदा भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय की कंपनी से कर दिया। अब इस जमीन पर फाइव स्टार होटल बनाने की तैयारी बताई जा रही है। सरकारी जमीन की खरीदी के आरोपों पर विधायक मालवीय ने मंगलवार को फ्रीगंज स्थित अपने ऑफिस में पत्रकारों से चर्चा की। कहा कि जमीन को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है कि यह महाकाल मंदिर की पार्किंग की जमीन है, लेकिन सच यह है कि यह महाकाल मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर है। उन्होंने कहा कि जमीन के आसपास पार्किंग बनाई है, जिसमें यह खसरा भी शामिल है। इस पर जमीन मालिक ने आपत्ति दर्ज कराई है। फिर भी यदि जमीन पर पार्किंग बना दी है तो यह जमीन सरकारी नहीं हो जाती है। रिकॉर्ड में जिसके नाम दर्ज हैं, जमीन उसी की रहती है। सरकार ने यदि पार्किंग बना दी तो सरकार उसका मुआवजा दे दे, यह कोर्ट में तय होगा। मंदिर की जमीन भाजपा विधायक को बेची : सिंघार कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने कहा कि उज्जैन में महाकाल मंदिर की पार्किंग वाली जमीन भाजपा विधायक की कंपनी को बेच दी गई। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने महाकाल मंदिर के पास एक जमीन सौदे को लेकर गंभीर आरोप लगाए। इसके बाद एक विवाद खड़ा हो गया है। सिंघार ने दावा किया है कि पार्किंग के लिए इस्तेमाल की जा रही सरकारी जमीन को एक ऐसी कंपनी को बेच दिया गया, जिसका संबंध भाजपा के एक विधायक से है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस जमीन को मूल रूप से सरकारी संपत्ति के तौर पर तय किया गया था, उसे पहले निजी बनाया गया और फिर यूटोपिया होटल एंड रिजॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड को बेच दिया गया। इस कंपनी के डायरेक्टरों में आलोट से भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय भी शामिल हैं। सिंघार ने सवाल उठाया कि क्या महाकाल लोक प्रोजेक्ट अब एक ऐसा जरिया बनकर रह गया है, जिससे रियल एस्टेट सौदों को बढ़ावा मिले और भाजपा नेताओं तथा मप्र में सत्ताधारी भाजपा सरकार के करीबियों को फायदा हो।
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महाकाल मंदिर की जमीन पर होटल बनाने का मामला:विधायक बोले- रिकॉर्ड देखकर ही खरीदी जमीन














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