Women outperform men in business management, with a 15% better survival rate than male entrepreneurs.


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भोपाल2 मिनट पहलेलेखक: राहुल शर्मा

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प्रदेश के बिजनेस ईकोसिस्टम में ‘पिंक रिवॉल्यूशन’ की दस्तक अब केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पुरुष प्रधान बाजार में महिलाओं की मजबूत पकड़ की गवाही दे रही है। पिछले पांच सालों का रिपोर्ट कार्ड बताता है कि महिलाएं न केवल नए आइडिया के साथ मैदान में उतर रही हैं, बल्कि स्टार्टअप चलाने और उसे बचाने के मामले में पुरुषों से कहीं आगे निकल गई हैं।

आंकड़ों के मुताबिक 2021 से 2025 के बीच प्रदेश में शुरू हुए 2769 महिला स्टार्टअप्स में से केवल 2.93 फीसदी (81) पर ताला लगा है, जबकि इसी अवधि में शुरू हुए 2876 पुरुष स्टार्टअप्स में बंद होने वाली इकाइयों की दर 3.48 फीसदी (100) रही। यह अंतर साबित करता है कि महिला उद्यमियों का ‘सर्वाइवल रेट’ पुरुषों के मुकाबले 15 फीसदी बेहतर है।

खास बात यह है कि यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है, जब निवेश, नेटवर्किंग और बाजार तक पहुंच जैसे मामलों में महिलाओं को अब भी ज्यादा संघर्ष करना पड़ता है।

32 से 846 तक पहुंचा महिला स्टार्टअप्स का कारवां: प्रदेश में महिला उद्यमिता का ग्राफ पिछले नौ साल में तेजी से ऊपर गया है। वर्ष 2017 में जहां महिला निदेशक वाले सिर्फ 32 स्टार्टअप्स पंजीकृत थे, वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर 846 तक पहुंच गई।

यानी नौ साल में महिला स्टार्टअप्स की संख्या 26 गुना से ज्यादा बढ़ी। जनवरी 2026 तक प्रदेश में ऐसे कुल 3368 स्टार्टअप्स दर्ज किए गए, जिनमें कम से कम एक महिला निदेशक शामिल है। 2026 के शुरुआती एक महीने में ही प्रदेश में 121 नये स्टार्टअप्स शुरु हुए हैं। सबसे तेज उछाल 2022 के बाद देखने को मिला, जब महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स हर साल सैकड़ों की संख्या में जुड़ने लगे।

निवेश के नाम पर चुनिंदा स्टार्टअप्स तक हीपहुंचा सहारा

महिलाओं के स्टार्टअप्स की संख्या भले तेजी से बढ़ी हो, लेकिन निवेश के मोर्चे पर तस्वीर सीमित नजर आती है। वैकल्पिक निवेश निधियों (AIF) से पांच साल में सिर्फ 4 महिला स्टार्टअप्स को ही करीब 17.23 करोड़ रुपए की मंजूरी मिल सकी। इनमें 2024 में एक स्टार्टअप को अकेले 9.99 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए।

वहीं स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम (SISFS) के तहत 2021 से 2025 तक 66 महिला स्टार्टअप्स को करीब 10.32 करोड़ रुपए मंजूर हुए। सबसे ज्यादा 20 स्टार्टअप्स को 2022 में फंड मिला, जबकि इसके बाद संख्या और राशि दोनों में उतार-चढ़ाव बना रहा। यानी महिला उद्यमिता का ग्राफ तेजी से ऊपर गया, लेकिन निवेश अब भी चुनिंदा हाथों तक ही सीमित है।



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