तीन महीने पहले होल्ड किया अब फिर जिला पदाधिकारी बनाया:भोपाल भाजपा में अश्विनी उपाध्यक्ष और पार्थ जिला मंत्री बने




भोपाल की भाजपा कार्यकारिणी में पिछले साढ़े तीन महीनों से चल रही अंतर्कलह और ‘होल्ड-रिलीज’ का खेल आखिरकार अब थमता नजर आ रहा है। 10 फरवरी से शुरू हुआ यह सियासी ड्रामा अब 20 एक नए नियुक्ति पत्र के साथ तीसरे और अंतिम दौर में पहुंच गया है। पार्टी ने डैमेज कंट्रोल करते हुए उन चेहरों को फिर से जिला पदाधिकारी बनाया है, जिन्हें पहली और दूसरी सूचियों के विवादों के कारण किनारे कर दिया गया था। पहली लिस्ट पर ही विवाद: बब्बा की एंट्री से सूची होल्ड इस ड्रामे की शुरुआत 10 फरवरी 2026 को हुई, जब जिला अध्यक्ष रविंद्र यती ने पहली कार्यकारिणी घोषित की थी। इस सूची में भाजपा कार्यालय में ही तोड़फोड़ करने के आरोपी सचिन दास बब्बा को जिला महामंत्री बना दिया गया। पार्टी दफ्तर को नुकसान पहुंचाने वाले को ही बड़ा पद सौंपे जाने पर स्थानीय सीनियर नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं ने बगावत कर दी। नतीजा यह हुआ कि महज 24 घंटे के भीतर 11 फरवरी को प्रदेश नेतृत्व के दखल के बाद इस लिस्ट को सोशल मीडिया से हटाकर पूरी कार्यकारिणी को ‘होल्ड’ (सस्पेंड) कर दिया गया। इस विवाद की गाज में कई अन्य योग्य नाम भी लपेटे में आ गए। दूसरी लिस्ट: ‘दागियों और पार्षदों’ की नो-एंट्री, नई साफ-सुथरी लिस्ट करीब 20 दिनों की लंबी माथापच्ची और आंतरिक समीक्षा के बाद 1 मार्च को भाजपा ने अपनी दूसरी और संशोधित सूची जारी की। प्रदेश संगठन के कड़े रुख के बाद इस सूची से विवादित चेहरा सचिन दास बब्बा और वर्तमान में निगम पार्षदों के नाम पूरी तरह साफ कर दिए गए। संगठन ने संदेश दिया कि केवल निर्विवाद और पुराने कार्यकर्ताओं को ही जगह मिलेगी। लेकिन इस कड़े फिल्टर के चक्कर में कई ऐसे कद्दावर और निष्ठावान नेता भी छूट गए, जिनका पहली लिस्ट में नाम तो था पर वे बब्बा विवाद की भेंट चढ़ गए थे। सूची से बाहर होने के बाद इन छूटे हुए नेताओं और उनके समर्थकों में भीतर ही भीतर नाराजगी पनप रही थी। डैमेज कंट्रोल की ‘तीसरी चिट्ठी’, छूटे नेताओं की वापसी इसी अंदरूनी असंतोष को शांत करने और संगठन में संतुलन बनाने के लिए आज 20 मई को जिला अध्यक्ष रविंद्र यती ने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति से एक नया पत्र जारी किया है। इस नए आदेश में उन वरिष्ठ चेहरों को भोपाल भाजपा का जिला पदाधिकारी बनाकर एड्जस्ट किया गया है, जो पिछली दोनों सूचियों के फेरबदल में पीछे छूट गए थे।



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