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बालोद जिले में कांकेर पुलिस ने आत्मसमर्पित नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक सराहनीय और मानवीय पहल की है। पुलिस प्रशासन ने पहली बार आत्मसमर्पित नक्सलियों को रेल यात्रा कराई और थियेटर में छत्तीसगढ़ी फिल्म दिखाई। इस पहल से आत्मसमर्पित नक्सलियों में खासा उत्साह और खुशी देखने को मिली। जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पित नक्सलियों ने एसडीओपी शेर बहादुर सिंह के समक्ष ट्रेन में सफर करने की इच्छा जताई थी। उनकी इस इच्छा को गंभीरता से लेते हुए पुलिस प्रशासन ने 15 आत्मसमर्पित नक्सलियों को भानुप्रतापपुर से बालोद जिले के दल्लीराजहरा तक ट्रेन से यात्रा कराई। आत्मसमर्पित नक्सलियों ने पहली बार की ट्रेन यात्रा रेल यात्रा के दौरान आत्मसमर्पित नक्सलियों ने पहली बार ट्रेन में सफर किया। सफर के दौरान उनके चेहरे पर उत्साह साफ दिखाई दिया। पुलिस अधिकारियों ने यात्रा के दौरान उनसे चर्चा कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने और बेहतर भविष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। आत्मसमर्पित नक्सलियों ने पहली बार देखा सिनेमा दल्लीराजहरा पहुंचने के बाद आत्मसमर्पित नक्सलियों ने फिल्म देखने की इच्छा जताई। इसके बाद एसडीओपी शेर बहादुर सिंह ने स्थानीय माथुर सिनेमा घर के संचालक से चर्चा कर सभी को सिनेमा हॉल ले गए, जहां उन्होंने छत्तीसगढ़ी फिल्म देखी। फिल्म देखने के दौरान सभी ने खुशी जाहिर करते हुए पुलिस की इस पहल की सराहना की। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आत्मसमर्पित नक्सलियों में आत्मविश्वास बढ़ाने, सामान्य जीवन के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से इस तरह की पहल लगातार की जा रही है। कांकेर पुलिस की यह पहल क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस दौरान आत्मसमर्पित नक्सलियों में शांति कोवाची, राजे मुचाकी, काजल नूरेटी, सारदो नरेटी, हिड़मे, सबिता कोवाची, राधिका काड़ियम, सुकारो नुरेटी, अनिला टेकम, गणेश उयंका, भीमा काड़ियाम, रामसिंह कोर्राम, नरसिंह नेताम, रमेश पद्दा और सुनिला शामिल रहे। कार्यक्रम में इंस्पेक्टर मनीष नागर और हेड कांस्टेबल हेमंत भूआर्य भी मौजूद रहे।
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आत्मसमर्पित नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने की अनोखी पहल:सरेंडर के बाद पहली बार किया ट्रेन में सफर, बालोद में देखी छत्तीसगढ़ी फिल्म















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