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झारखंड जैव विविधता बोर्ड ने राज्य की समृद्ध प्राकृतिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित करने के लिए कुल 19 नए स्थलों को जैव विविधता विरासत स्थल या BHS (बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट) घोषित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। सरकार की स्वीकृति मिलते ही इन्हें आधिकारिक सूची में शामिल कर लिया जाएगा। गौरतलब है कि पिछले साल सरकार ने हजारीबाग की ‘कनहरी पहाड़ी’ को राज्य का पहला जैव विरासत स्थल घोषित किया था। वर्तमान में राज्य में करीब 100 संभावित स्थल चिह्नित हैं, जिनमें से 4 अकेले रांची जिले में मौजूद हैं। सबसे अधिक गिरिडीह जिले में हैं। अब पुरखों की प्राकृतिक विरासत होंगे संरक्षित झारखंड जैव विविधता पर्षद के अध्यक्ष विश्वनाथ शाह ने बताया कि इन 19 स्थलों को इस सूची में शामिल करने का मुख्य उद्देश्य स्थानीय समुदायों के सहयोग से यहां की लुप्तप्राय प्रजातियों, औषधीय पौधों व सांस्कृतिक रूप से जुड़े जंगलों को कानूनी संरक्षण प्रदान करना है। बीएचएस घोषित होने से बड़े पैमाने पर होने वाले व्यावसायिक खनन और बड़े कंक्रीट निर्माणों पर रोक लगती है। यह घोषणा यह सुनिश्चित करती है कि आर्थिक प्रगति की होड़ में हमारे पुरखों की प्राकृतिक विरासत नष्ट न हो। रांची जिले में हैं 4 बीएचएस: रांची में ऐसे 4 बीएचएस हैं, जो अनगड़ा प्रखंड के चतरा गांव में हैं। रांची से 20 किलोमीटर दूर चतरा पंचायत महिलौंग रिंग रोड में स्थित है। यहां के सरना स्थल में विचित्र वृक्ष है, जिसमें बढ़ साल व करम एक साथ विगत 200 साल से जीवित हैं। यह सरना स्थल 5 हेक्टेयर में फैला है। वहां से 2 किमी दूर बुढ़वा महादेव है, जहां घना जंगल है, झरने भी हैं। यहां साल, महुआ, करम बीजों का संरक्षण होता है।
लुगुबुरु घंटाबाड़ी धोरोमगढ़ ये 19 साइट हैं प्रस्तावित… लुगुबुरु घंटाबाड़ी धोरोमगढ़ (बोकारो), पारसनाथ पहाड़, खंडोली डैम, बेदपुर जंगल, बांसजोड़ जंगल, लुप्पी जंगल, डोमा पहाड़ी, कमलासिंघा, पोखरिया, केंदुआडीह (गिरिडीह), लुकैया (धनबाद), मैसामुंगेर (दुमका), चंदरी चट्टान (हजारीबाग), त्रिकुट पहाड़ (देवघर), कंचनपुर छड़वा डैम का भाग, भेलवारा जंगल (हजारीबाग), पहाड़ी बाबा देवस्थल (पाकुड़), कुंदरी पलास बगान (पलामू) और लिगिरदा स्वंप (सारंडा)। विश्वनाथ शाहअध्यक्ष, झारखंड जैव विविधता पर्षद, रांची विश्वनाथ शाह ने बताया कि झारखंड जैव विविधता पर्षद व वन विभाग इस बार उत्कृष्ट कार्यों के लिए भगवान बिरसा मुंडा, सिदो कान्हू व तिलका मांझी अवॉर्ड देगा। ‘संजीवनी फॉर लाइफ’ पत्रिका का शुभारंभ होगा व संकटग्रस्त प्रजातियों का संरक्षण का कार्य किया जाएगा। जनभागीदारी से वनीकरण, जल संरक्षण कार्य होगा। युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स, यूट्यूब पर सक्रियता बढ़ाई है। बोर्ड शोध कार्यों के नॉलेज बैंक के रूप में विकसित होगा।
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