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मध्य प्रदेश के जबलपुर में देश की चौथी सबसे बड़ी रिंग रोड का निर्माण हो रहा है। पनागर, पाटन और बरगी क्षेत्र के आसपास की वह जमीन, जो कभी आदिवासी परिवारों को गुजरा-भत्ता और भरण-पोषण के लिए दी गई थी, अब तेजी से बिक रही है। इन जमीनों की कीमत रिंग रोड परियोजना के बाद करोड़ों रुपए तक पहुंच गई है। आरोप है कि जमीन मालिकों को लाखों रुपए मिलने का लालच दिया गया, लेकिन वास्तविक भुगतान बेहद कम किया गया। कई मामलों में जमीन मालिकों को अपनी ही जमीन की रजिस्ट्री होने तक की जानकारी नहीं लगी। दैनिक भास्कर के हाथ लगी कुछ रजिस्ट्रियां इस पूरे मामले में बड़े जमीन कारोबार और संभावित गड़बड़ी की ओर इशारा कर रही हैं। 37 लाख की रजिस्ट्री, महिला बोली- 5 लाख में बेची ग्राम मंझगवा निवासी किशना उर्फ किस्सो बाई ने हाल ही में अपनी 0.56 हेक्टेयर जमीन बेची है। यह जमीन रिंग रोड से लगी हुई बताई गई है। रजिस्ट्री के अनुसार, किस्सो बाई ने यह जमीन सुहागी निवासी किरण साहू को 37 लाख रुपए में बेची। दस्तावेजों में पूरा भुगतान आरटीजीएस के जरिए आईसीआईसीआई बैंक लिमिटेड से होना बताया गया है, लेकिन बैंक शाखा का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। बेचने के बाद कुंडम में खरीदी दूसरी कृषि भूमि रजिस्ट्री दस्तावेज में उल्लेख है कि किस्सो बाई ने मंझगवा की जमीन बेचने के बाद कुण्डम क्षेत्र में नई कृषि भूमि खरीदी। दस्तावेज के अनुसार, कमिश्रर कार्यालय जबलपुर के आदेश के तहत मौजा साल्हेपानी, हल्का नंबर-58, सरहदा तहसील कुण्डम में खसरा नंबर-75 की 1.9100 हेक्टेयर कृषि भूमि खरीदी गई है। 33.40 लाख में बेची 0.474 हेक्टेयर जमीन मंझगवा गांव के संदीप कोल, वंदना कोल, वित्तो बाई और रंजीत कोल ने अपनी 0.474 हेक्टेयर जमीन बाजार मोहल्ला सिलौंदी, सिहोरा निवासी रवि कुमार को 33 लाख 40 हजार रुपए में बेची। रजिस्ट्री के अनुसार पूरा भुगतान आरटीजीएस के जरिए किया गया। दस्तावेजों में अलग-अलग खातों में भुगतान दर्शाया गया है। किसी खाते में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, कुण्डम रोड पिपरिया शाखा से राशि भेजी गई, तो किसी में बैंक ऑफ बड़ोदा पनागर और बैंक ऑफ इंडिया तेवर-भेड़ाघाट शाखा से भुगतान किया गया। अभी कुछ रकम रोकी गई, बाद में मिलेगी रजिस्ट्री में उल्लेख है कि मंझगवा की जमीन बेचने के बाद संदीप कोल के परिवार ने मौजा टुरका, पटवारी हल्का नंबर-28, तहसील कुंडम में खसरा नंबर 639/2 की 0.6000 हेक्टेयर कृषि भूमि खरीदी है। रहवासी बोले- शासकीय जमीन को लेकर हुआ धोखा जबलपुर निवासी देव प्रकाश दुबे ने आरोप लगाया कि रिंग रोड के आसपास बड़ी मात्रा में शासकीय और वन विभाग की जमीन मौजूद है। शासन ने इनमें से कुछ जमीन आदिवासी और कोल समाज के लोगों को भरण-पोषण के लिए दी थी, लेकिन अब इन्हें बेचा जा रहा है। देव प्रकाश दुबे का कहना है कि उनके साथ भी जमीन के मामले में धोखा हुआ। उन्होंने दावा किया कि किस्सो बाई कोल ने साहू परिवार को जमीन बेचने से पहले उनसे भी एग्रीमेंट किया था। बाद में पता चला कि जमीन शासकीय श्रेणी की है और उसका हस्तांतरण नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि रिंग रोड से जुड़ी जमीनों की खरीद-फरोख्त में बड़ा स्कैम चल रहा है, जिसमें पप्पू ठाकुर और दस्सी सोनकर के नाम सामने आ रहे हैं। एसडीएम बोले- मामला बड़ा घोटाला लग रहा मामले में जबलपुर एसडीएम अभिषेक सिंह ने जांच कराने की बात कही है। उनका कहना है कि सामने आई कुछ रजिस्ट्रियों में लाखों रुपए के ट्रांजेक्शन दर्ज हैं, जबकि जमीन मालिकों को बेहद कम राशि मिलने की बात सामने आ रही है। एसडीएम के मुताबिक जिन जमीनों की खरीद-फरोख्त हुई है, वह शासन से दी गई है। यह अहस्तांतरणीय जमीनें हैं। मामले की जांच कराई जाएगी। मैं स्वयं मौके पर जाकर वस्तुस्थिति का निरीक्षण करूंगा।
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जबलपुर में भू-माफिया ने खरीदी आदिवासियों की जमीन:मामूली कीमत देकर नाम करवाई बेशकीमती जमीन; अब SDM करवाएंगे जांच















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