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नर्मदापुरम जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मढ़ई और रेनी पानी में टैक्स वसूली को लेकर जिला पंचायत और लग्जरी रिसॉर्ट संचालकों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। जंगल और देनवा नदी के किनारे बसे इन क्षेत्रों में करीब 40 छोटे-बड़े लग्जरी रिसॉर्ट्स और होम-स्टे हैं, जिनका सालाना कारोबार करोड़ों रुपए का है, लेकिन जब बात पंचायत टैक्स चुकाने की आती है तो ये पीछे हट जाते हैं। कई संचालकों ने तो 7 साल से टैक्स नहीं दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस डिफॉल्टर लिस्ट में निजी रिसॉर्ट्स के साथ-साथ सरकारी संस्थान एमपी टूरिज्म का नाम भी शामिल है। पढ़िए रिपोर्ट… 72 लाख बकाया में से सिर्फ 4 लाख ही जमा हुए जिला पंचायत ने सोहागपुर ब्लॉक की दो पंचायतों टेकापार (मढ़ई) और मगरिया (रेनी पानी) में संचालित 40 रिसॉर्ट और होम-स्टे संचालकों को चिह्नित किया है। इन पर पंचायत का करीब 72 लाख रुपए टैक्स बकाया है। जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन के निर्देश पर पंचायत सचिवों ने नोटिस जारी कर टैक्स जमा करने के लिए कहा। बैठकें की, लेकिन टैक्स केवल 4.34 लाख रुपए ही जमा हो सका। सीईओ ने टैक्स जमा नहीं करने वालों पर कार्रवाई की बात कही है। वहीं रिसॉर्ट संचालकों का आरोप है कि पंचायत सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा रही। उनका कहना है कि पंचायत ने कचरा निपटान तक की व्यवस्था नहीं की है। रिसॉर्ट संचालकों के अनुसार, कचरा निपटान पर ही उन्हें हर साल 35 से 40 हजार रुपए अतिरिक्त खर्च करना पड़ते हैं। उनका सवाल है कि जब सुविधाएं नहीं मिल रहीं तो टैक्स किस बात का? नोटिस के बाद सिर्फ 4 ने भरा टैक्स इन संस्थानों का टैक्स आकलन बाकी अमोली होम स्टे, सिल्क स्टेट मढ़ई, सतपुड़ा सिल्क रिट्रीट होम स्टे, माउंटेन मिस्ट होम स्टे, बनवास होम स्टे, जयराम धुर्वे, पलकमती होम स्टे (सरवन धुर्वे), जंगल व्यू होम स्टे (हरिओम), महिला होम स्टे (संजीव मर्सकोले), सतपुड़ा ट्राइबल होम स्टे (सुखदेव धुर्वे), चिंकारा होम स्टे (रेवती धुर्वे) और द लेपर्ड हिल होम स्टे (लीला यादव) का टैक्स आकलन अभी बाकी है। सबसे ज्यादा बकाया रेनी पानी जंगल लॉज पर दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि ग्राम पंचायत मगरिया के रेनी पानी जंगल लॉज पर सबसे ज्यादा 15 लाख 22 हजार 312 रुपए का टैक्स बकाया है। इसके अलावा देनवा बैकवॉटर स्क्रैप पर 11 लाख 89 हजार 842 रुपए और मनीष कालानी इंदौर फार्महाउस पर 6 लाख 89 हजार 946 रुपए का टैक्स बकाया है। सबसे कम बकाया होटल सतपुड़ा वैली पर 8,790 रुपए है। टेकापार और रेनी पानी पंचायतों का कुल बकाया टैक्स 72 लाख 20 हजार 756 रुपए है। टैक्स जमा करने में एमपी टूरिज्म भी पीछे पंचायत का राजस्व नहीं चुकाने वालों में निजी रिसॉर्ट के साथ सरकारी संस्थान का नाम भी शामिल है। एमपी टूरिज्म के मढ़ई स्थित बायसन लॉज पर 4.99 लाख रुपए का टैक्स बकाया है। वर्ष 2020 से 2026 तक पंचायत टैक्स जमा नहीं कराया गया। एमपीटी के रीजनल मैनेजर एयू खान का कहना है कि एमपी टूरिज्म की किसी भी होटल या रिसॉर्ट पर इस प्रकार का पंचायत टैक्स लागू नहीं होता। फॉरसिथ लॉज ने जमा कराया टैक्स दो महीने पहले जिस फॉरसिथ लॉज में वन्यजीवों के अंग मिलने का मामला सामने आया था, उसका नाम भी बकायादारों की सूची में शामिल था। हालांकि, पिछले महीने रिसॉर्ट प्रबंधन ने पंचायत खाते में 2 लाख 35 हजार 689 रुपए जमा करा दिए हैं। टैक्स नहीं देने वालों पर कार्रवाई होगी जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन ने कहा कि मगरिया और टेकापार पंचायत क्षेत्रों में कई रिसॉर्ट और होम-स्टे संचालकों ने पंचायत टैक्स जमा नहीं किया है। ऐसे लोगों पर कार्रवाई होगी। रिसॉर्ट संचालकों का पक्ष- सुविधा शून्य, फिर टैक्स क्यों? पंचायत टैक्स को लेकर दैनिक भास्कर टीम ने गौरीशा, लहरहा, ड्रीम व्यू समेत अन्य रिसॉर्ट संचालकों से बात की। उन्होंने ऑफ कैमरा कहा कि पंचायत टैक्स वसूलने के लिए तो सक्रिय है, लेकिन सुविधाएं देने में पीछे है। उनका कहना है कि न सड़कों की सफाई होती है, न स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था है और न ही कचरा निपटान की कोई सुविधा उपलब्ध कराई गई है। रिसॉर्ट से निकलने वाला कचरा हर सप्ताह विशेष वाहन से सोहागपुर भेजा जाता है। एक बार में 1 से 2 हजार रुपए तक खर्च आता है। इस तरह सालभर में केवल कचरा निपटान पर 35 से 40 हजार रुपए खर्च हो जाते हैं। ईको सेंसिटिव जोन में आते हैं रिसॉर्ट ग्राम पंचायत टेकापार के सारंगपुर-मढ़ई क्षेत्र में बने अधिकांश रिसॉर्ट सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बागड़ा बफर क्षेत्र में आते हैं। देनवा नदी का बैकवॉटर क्षेत्र बफर और कोर जोन से जुड़ा है, जो ईको सेंसिटिव जोन के दायरे में आता है। इसी कारण यहां नए व्यावसायिक निर्माण पर रोक है। रिसॉर्ट संचालक नए निर्माण नहीं कर सकते। यहां तक कि लाइटिंग का उपयोग भी निर्धारित नियमों के तहत ही करना पड़ता है। ‘पंचायत दोबारा हिसाब लगाकर टैक्स तय करे’ देनवा बैकवॉटर और ड्रीम व्यू रिसॉर्ट के संचालकों ने पंचायत के टैक्स नोटिस पर जवाब देते हुए कहा है कि पंचायत ने गलत तरीके से टैक्स तय किया है। उनका कहना है कि रिसॉर्ट की जमीन और निर्माण के हिसाब से दोबारा सही आकलन कर टैक्स लगाया जाए। संचालकों के मुताबिक, ड्रीम व्यू रिसॉर्ट के लिए जमीन जून 2018 में खरीदी गई थी, 2019 में निर्माण शुरू हुआ और साल 2021 में रिसॉर्ट शुरू हुआ। इसके बावजूद पंचायत ने 2018 और 2019 का भी टैक्स जोड़ दिया, जबकि हकीकत में टैक्स 2022 से लगना चाहिए। रिसॉर्ट संचालक का कहना है कि वे 44 हजार रुपए का चेक पंचायत को पहले ही जमा कर चुके हैं और पंचायत को निर्माण लागत व वास्तविक समय के आधार पर दोबारा टैक्स तय करना चाहिए।
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मढ़ई-रेनीपानी के लग्जरी रिसॉर्ट्स पर 72 लाख का टैक्स बकाया:एमपी टूरिज्म भी डिफॉल्टर की लिस्ट में, एक लॉज पर अकेले 15 लाख बाकी
















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