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राजधानी में नंबर प्लेट की हेराफेरी का खेल चल रहा है। कार का नंबर बाइक में और बाइक का नंबर कार में चल रहा है। इसकी कीमत वे लोग चुका रहे हैं जिनका इस पूरे खेल से कोई लेना-देना ही नहीं। बीते 6 महीने में फर्जी नंबर प्लेट लगाकर घूमने की 119 शिकायतें दर्ज की गई हैं। यानी 119 ऐसे लोग, जिन्होंने कोई नियम नहीं तोड़ा, लेकिन उनके नाम पर चालान कट गए। अब वे या तो जुर्माना भर रहे हैं या फिर अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए ट्रैफिक दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। हैरानी की बात यह कि इसमें सिर्फ 14 मामले पर ही कार्रवाई हुई है, और सिर्फ 3 आरोपियों को ही जेल भेजा जा सका है। इससे समझा जा सकता है कि फर्जी नंबर लगाकर गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने में पुलिस कितनी चौकस है। कई मामले ऐसे भी सामने आए है जिनमें जानबूझकर दूसरे वाहनों का नंबर अपनी बाइक और स्कूटी पर लगाकर अपराधी सड़कों पर घूम रहे हैं। रांची यूनिवर्सिटी के कर्मचारी, पत्रकार, बिजनेसमैन समेत ऐसे दर्जनों लोग है जो इस प्रकार की परेशानी झेल रहे हैं।
आगे क्या… ई-डिटेक्शन सिस्टम होगा लागू रांची में महानगरों की तर्ज पर ई-डिटेक्शन सिस्टम लागू करने की तैयारी है। इस हाईटेक सिस्टम में ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन कैमरे लगाए जाएंगे, जो गुजरते वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन कर उनकी पूरी कुंडली सामने ला देंगे। बीमा, फिटनेस सर्टिफिकेट, पेंडिंग चालान और अन्य दस्तावेजों की जानकारी तुरंत स्क्रीन पर दिखाई देगी। 6 वर्षों में 228 करोड़ का चालान, वसूली 40 करोड़
साल 2021 से अप्रैल 2026 तक ऐसे मामलों में करीब 228 करोड़ रुपए का चालान काटा गया, लेकिन इसमें से सिर्फ 40 करोड़ रुपए ही जमा हुए। शहर में लगे ऑटोमेटिक कैमरे लगातार नियम तोड़ने वालों को पकड़ रहे हैं, फिर भी छह वर्षों में 21 लाख 4 हजार 917 लोग ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कर चुके हैं। आंकड़े बताते हैं कि बाइक सवार सबसे बड़े नियम तोड़ने वाले बनकर उभरे हैं। 3 से ज्यादा चालान पर गाड़ी सीज करने का आदेश ट्रैफिक रूल तोड़ने पर चालान 3 या उससे अधिक कट जाए तो गाड़ी सीज करने का ट्रैफिक पुलिस का आदेश है। पर ऐसे सैकड़ों वाहन चल रहे हैं, जिनके ऊपर दर्जनों चालान हैं। हालांकि इस नियम से वे लोग भी परेशान हैं जिन्होंने ट्रैफिक रुल ब्रेक नहीं किया है। जिन्हें गलत चालान गया, वे आवेदन दें
फर्जी नंबर प्लेट लगाने वालों पर क्या कार्रवाई हो रही है? -ऐसे लोगों पर कार्रवाई हुई है, 3-4 को जेल भी भेजा गया है। ऐसे लोगों को आइडेंटिफाई कैसे करेंगे? -आरसी बुक चेक करने से ही गलत व्यक्ति चिह्नित होता है। सवाल : जिनके साथ ऐसा हुआ है, वे क्या करें? – ट्रैफिक एसपी कार्यालय में आवेदन दें, उनका चालान कैंसिल हो जाएगा। पहले भी कैंसिल किया गया है। चालान बाइक का, नंबर स्कूटी का: अरगोड़ा निवासी अमित कुमार भी इसी धोखाधड़ी के शिकार बने। उनकी स्कूटी के नंबर से दूसरी बाइक पर रेड लाइट जंप, बिना हेलमेट और नो-पार्किंग जैसे कई उल्लंघनों के चालान कटते रहे। शिकायत के बाद खुलासा हुआ कि कोई और उनके वाहन नंबर का इस्तेमाल कर रहा था। राकेश सिंह, ट्रैफिक एसपी चालान में बाइक, नंबर कार का : हेहल निवासी नीरज कुमार श्रीवास्तव के घर 20 अप्रैल को 7 हजार रुपए का चालान पहुंचा। चालान तीन अलग-अलग ट्रैफिक नियम तोड़ने पर कटा था। लेकिन जब उन्होंने तस्वीर देखी, तो उनके होश उड़ गए। चालान में बाइक की तस्वीर थी, जबकि नंबर उनकी कार का था। कार का नंबर लगा घूम रहा बाइकवाला ऐसा ही मामला सदर थाना क्षेत्र के चंद्र प्रकाश रावत के साथ हुआ। उनकी ओमनी कार के नंबर पर बिना हेलमेट बाइक चलाने का चालान घर पहुंच गया। तस्वीर में बाइक साफ दिख रही थी, जबकि नंबर उनकी कार का था। एक बार नहीं, बल्कि चार बार उनके साथ ऐसा हो चुका है।
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