जलमीनार निर्माण मुद्दे पर सड़क पर उतरे जिले भर के पार्षद, एनएच जाम




भास्कर न्यूज|गुमला शहर के बाजारटांड़ में अमृत मिशन योजना के तहत 113 करोड़ रुपए की प्रस्तावित जलमीनार निर्माण के मुद्दे पर अब स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं। प्रशासनिक सुस्ती और टालमटोल की नीति से आक्रोशित पार्षदों ने शहर की सरकार की ताकत दिखाते हुए सड़कों पर उतरकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी के नेतृत्व में पार्षदों के एक बड़े दल ने न सिर्फ धरना दिया बल्कि टावर चौक स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग को करीब सवा घंटे तक पूरी तरह जाम रखा। इस आंदोलन को स्थानीय जनता का भी भरपूर समर्थन मिला। शुक्रवार को सुबह ठीक 11 बजे से ही उपाध्यक्ष और पार्षद बाजारटांड़ में जलमीनार के लिए पहले से चिन्हित की गई भूमि पर धरने पर बैठ गए। आंदोलनकारियों का साफ कहना था कि जनहित की इस बेहद महत्वपूर्ण योजना को प्रशासनिक लापरवाही के कारण लटकने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने मांग की कि जलमीनार का निर्माण इसी चिन्हित स्थल पर ही शुरू किया जाए। सूचना मिलते ही एसडीओ के प्रतिनिधि के तौर पर एसडीपीओ सुरेश प्रसाद यादव, नप के ईओ मनीष कुमार और सीओ हरीश कुमार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों की टीम ने धरना दे रहे जनप्रतिनिधियों को समझाने और शांत कराने का काफी प्रयास किया। हालांकि आक्रोशित पार्षद इस बात पर अड़ गए कि एसडीओ को खुद मौके पर आकर स्थिति स्पष्ट करनी होगी। बात न बनती देख अधिकारियों की टीम को वापस लौटना पड़ा। दोपहर 1:15 बजे तक जब कोई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी दोबारा वार्ता के लिए नहीं आया, तो पार्षदों और स्थानीय लोगों का धैर्य जवाब दे गया। इसके बाद आंदोलनकारियों ने टावर चौक के पास बैरिकेडिंग कर दी और मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया। चक्काजाम के कारण हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मौके पर उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी, मनीष कुमार, संगियस तिर्की, प्रवीण टोप्पो, लखन राम, मधु मेरिना तिर्की, अनिल यादव, जसवंत कौर, जयराम इंदवार, नेहा लकड़ा, हेमलता देवी, विजेता मिंज, नूतन रानी, सब्बू, बबलू वर्मा आदि मौजूद थे। इधर अध्यक्ष शकुंतला उरांव किसी अनिवार्य कारणवश व्यक्तिगत रूप से आंदोलन में शामिल नहीं हो सकीं। हालांकि उन्होंने दूरभाष के माध्यम से पार्षदों के इस आंदोलन को अपना पूरा समर्थन दिया। बैठक के आश्वासन पर आंदोलन स्थगित बाद में दोबारा भारी अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि आगामी एक जून को इस संवेदनशील मुद्दे को सुलझाने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में सभी पक्षों को ध्यान में रखकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। आश्वासन के बाद परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने अपने आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने का फैसला लिया। साथ ही चेतावनी दी गई की अगर समाधान नहीं निकला तो आंदोलन होगा।



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