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कानपुर प्राणि उद्यान (जू) के प्रेमियों के लिए एक अच्छी खबर है। आने वाले दिनों में जू में शेरों की दहाड़ और तेज होने वाली है। कानपुर जू में शेरों का कुनबा बढ़ाने के लिए एक खास तैयारी चल रही है। सब कुछ ठीक रहा तो अगले कुछ महीनों में इंदौर के जूलॉजिकल पार्क से एक युवा शेरनी कानपुर के कुनबे का हिस्सा बनेगी। खास बात यह है,कि इस शेरनी को लाने के बदले कानपुर जू प्रशासन इंदौर को अपने यहां का एक नर हिप्पो (दरियाई घोड़ा) सौंपेगा। दोनों चिड़ियाघरों के बीच इस ‘एक्सचेंज प्रपोजल’ पर सहमति बन गई है और फिलहाल कागजी कार्रवाई का काम तेजी से चल रहा है। इनब्रीडिंग रोकने के लिए आ रही नई शेरनी कानपुर जू के वन्यजीव चिकित्सक डॉ. नासिर ने बताया कि, इंदौर से जो एशियाटिक लायनेस (शेरनी) लाई जा रही है, उसकी उम्र करीब साढ़े तीन से चार साल है। वह एक युवा शेरनी है। दरअसल, वर्तमान में कानपुर जू में मौजूद ‘शंकर’ और ‘उमा’ नाम के शेर-शेरनी आपस में भाई-बहन हैं। अगर भाई-बहन के बीच ब्रीडिंग होती है, तो उसे ‘इनब्रीडिंग’ कहा जाता है, जिससे पैदा होने वाले शावकों में बीमारियां और शारीरिक कमजोरी का खतरा रहता है। इसी खतरे को टालने और बाहर का ब्लड लाइन लाने के लिए इस नई शेरनी को लाया जा रहा है। उम्मीद है कि शंकर के साथ इस नई शेरनी की पेयरिंग (जोड़ी) कामयाब रहेगी और भविष्य में कानपुर जू में नन्हें शावकों की किलकारियां गूंजेंगी। आसान नहीं है हिप्पो को भेजना, पिंजरे में आने में लगेगा महीना भर इस पूरे अदला-बदली के मिशन में सबसे बड़ी चुनौती इंदौर भेजे जाने वाले हिप्पो को पकड़ना और उसे सुरक्षित गाड़ी में लोड करना है। डॉ. नासिर के मुताबिक, हिप्पो के साइज और वजन को देखते हुए उसके लिए एक खास पिंजरा तैयार किया जा रहा है। हिप्पो को जबरन पिंजरे में नहीं डाला जा सकता, इसलिए केज बनने के बाद उसे हिप्पो के बाड़े में इंस्टॉल किया जाएगा। इसके बाद लगभग एक महीने तक उसी पिंजरे के अंदर हिप्पो के लिए चारा और पानी डाला जाएगा। जब हिप्पो को उस पिंजरे की आदत हो जाएगी और वह बिना डरे उसमें आने-जाने लगेगा, तब उसे लॉक करके ट्रांसपोर्ट किया जाएगा। मौसम ठंडा होने का इंतजार, 4 से 6 महीने में पूरी होगी प्रक्रिया इस पूरी प्रक्रिया में कितना समय लगेगा? इसके जवाब में जू प्रशासन का कहना है कि हिप्पो का नया केज बनाने, उसे पिंजरे का आदी करने और मौसम के अनुकूल होने में कम से कम 3 से 4 महीने का वक्त लगेगा। चूंकि अभी गर्मी का मौसम है, इसलिए जानवरों को इतनी दूर शिफ्ट करना उनके स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। जू प्रशासन का प्लान है कि जैसे ही मौसम ठंडा और अनुकूल होगा, वैसे ही इस ट्रांसपोर्टेशन को अंजाम दिया जाएगा। कुल मिलाकर इस पूरे प्रोसेस को पूरा होने और कानपुर में नई शेरनी के दीदार करने में 4 से 6 महीने का समय लग सकता है।
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कानपुर जू में बढ़ेगा शेरों का कुनबा:इंदौर से आएगी साढ़े 3 साल की शेरनी, बदले में दिया जाएगा नर हिप्पो















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