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झारखंड में लाल आतंक के खिलाफ (सीआरपीएफ और राज्य पुलिस के संयुक्त अभियान ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी है। वर्ष 2013 से 22 मई 2026 तक चले लगातार ऑपरेशन के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि बूढ़ा पहाड़ से लेकर पारसनाथ की पहाड़ियों तक सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के
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सुरक्षाबलों की रणनीति के कारण नक्सलियों का नेटवर्क आर्थिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर ध्वस्त हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि के दौरान कुल 5,471 नक्सलियों को सलाखों के पीछे भेजा गया है। जबकि 306 नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटते हुए आत्मसमर्पण किया है। नक्सलियों के ठिकाने और कैंपों को उखाड़ फेंकने में साल 2025 और 2026 के शुरुआती महीने सबसे ज्यादा आक्रामक रहे हैं, जहां रिकॉर्ड संख्या में बंकर और हिड-आउट्स तबाह किए गए हैं। हालांक 15 नवंबर 2000 से लेकर 22 मई 2026 तक 556 सुरक्षाकर्मी शहीद भी हुए हैं।
सुरक्षाबलों ने नक्सलियों द्वारा सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए बिछाए गए मौत के जाल को समय रहते नाकाम किया है। 13 वर्षों में कुल 6,314 आईईडी बरामद कर डिफ्यूज किए गए। सबसे ज्यादा 984 आईईडी साल 2022 में मिले। नक्सलियों के पास से 1,25,924 डेटोनेटर जब्त किए गए। साल 2015 में अकेले 48,257 डेटोनेटर पकड़े गए थे। अभियानों में 3,139 अत्याधुनिक व पारंपरिक हथियार और 1,29,513 कारतूस बरामद किए गए।
आर्थिक चोट से नेटवर्क टूटा, करोड़ों की लेवी जब्त
नक्सलियों के जबरन वसूली और लेवी के तंत्र पर पुलिस ने तगड़ा प्रहार किया है। साल 2023 तक जहां लेवी कैश लाखों में दर्ज हो रहा था, वहीं 2024 के बाद से जांच एजेंसियों और सुरक्षाबलों की कड़ाई के कारण करोड़ों की बेनामी संपत्ति और कैश पर गाज गिरी है। 2024 में 29,93,870, वर्ष 2025 में 45,33,717, वर्ष 2026 अब तक: 13,41,125 और अबतक कुल 12 करोड़ रुपए से अधिक का कैश व लेवी नेटवर्क को पकड़ ध्वस्त किया गया।
किस वर्ष कितने नक्सली हुए ढेर
| वर्ष | मारे गए नक्सली |
| 2013 | 13 |
| 2014 | 08 |
| 2015 | 25 |
| 2016 | 21 |
| 2017 | 07 |
| 2018 | 16 |
| 2019 | 26 |
| 2020 | 14 |
| 2021 | 06 |
| 2022 | 11 |
| 2023 | 09 |
| 2024 | 12 |
| 2025 | 35 |
| 2026 (22 मई तक) | 22 |
| कुल योग | 225 |














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