MP Fake Doctor Caught | Cheital Clinic Ajay Mourya Staff Shocked


MP का स्वास्थ्य महकमा फर्जी डॉक्टरों के खुलासे से हिल गया है। दमोह और जबलपुर के संजीवनी क्लीनिक में फर्जी एमबीबीएस डिग्री और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) के जाली रजिस्ट्रेशन के सहारे नौकरी कर रहे तीन कथित डॉक्टरों के पकड़े जाने के बाद एनएचएम (राष्ट

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दमोह पुलिस की कार्रवाई में अब तक तीन फर्जी डॉक्टर पकड़े जा चुके हैं। इनमें ग्वालियर निवासी सचिन यादव, सीहोर निवासी राजपाल गौर और जबलपुर के चेरीताल स्थित संजीवनी क्लीनिक में पदस्थ अजय मौर्य शामिल हैं।

ऐसा पता चला है कि ये फर्जी डॉक्टर हर महीने 80 हजार रुपए वेतन लेता था और सिर्फ 2 घंटे के लिए क्लीनिक में आता था। अजय मरीजों को देखता नहीं था। मरीजों को देखने का काम स्टाफ ही करता था। अजय की यहां नियुक्ति मार्च 2025 में हुई थी।

संजीवनी क्लीनिक में बैठा स्टाफ जो दवा देते थे।

संजीवनी क्लीनिक में बैठा स्टाफ जो दवा देते थे।

मरीजों ने बताया- काउंटर पर बैठा स्टाफ ही देता था दवा

इस पूरे मामले की शुरुआत दमोह से हुई, जहां सीएमएचओ कार्यालय ने संजीवनी क्लीनिक में पदस्थ दो डॉक्टरों के दस्तावेजों की जांच कराई। जांच में उनकी डिग्री और मेडिकल रजिस्ट्रेशन संदिग्ध पाए गए। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की तो दस्तावेज पूरी तरह फर्जी निकले।

पूछताछ में जबलपुर के चेरीताल संजीवनी क्लीनिक में पदस्थ डॉक्टर अजय मौर्य का नाम सामने आया, जिसे बाद में हिरासत में लिया गया।

दैनिक भास्कर की टीम ने जब चेरीताल स्थित संजीवनी क्लीनिक पहुंचकर पड़ताल की तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। क्लीनिक में इलाज कराने पहुंचे मरीजों ने बताया कि डॉक्टर अजय मौर्य कभी नियमित रूप से मरीज नहीं देखते थे।

अधिकांश समय रजिस्ट्रेशन काउंटर पर बैठा स्टाफ मरीजों की परेशानी सुनकर सीधे दवा दे देता था। मरीजों का कहना था कि डॉक्टर अक्सर सिर्फ कुछ देर के लिए क्लीनिक आते और सीधे अपने केबिन में चले जाते थे।

यहां काउंटर से ही दी जाती थी दवा।

यहां काउंटर से ही दी जाती थी दवा।

क्लीनिक में आकर सीधे केबिन में गए

चेरीताल निवासी महेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि वह पिछले चार महीने से इलाज के लिए क्लीनिक जा रहे थे, लेकिन उन्होंने कभी डॉक्टर को मरीज देखते नहीं पाया। उनका कहना था कि काउंटर पर जानकारी लेकर सीधे दवा दे दी जाती थी और डॉक्टर के पास जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती थी। वहीं एक अन्य मरीज राजकुमार ने बताया कि क्लीनिक में इलाज का पूरा काम स्टाफ ही संभालता था और डॉक्टर केवल औपचारिक रूप से दिखाई देते थे।

क्लीनिक में काम करने वाली कम्प्यूटर ऑपरेटर दुर्गेश नंदनी ने भी बताया कि अजय मौर्य रोजाना सिर्फ दो घंटे के लिए आते थे। वह सीधे अपने केबिन में चले जाते और ज्यादा देर रुकते भी नहीं थे। स्टाफ को कभी शक नहीं हुआ कि वह फर्जी डॉक्टर हो सकते हैं।

अजय मौर्य का केबिन व खाली कुर्सी।

अजय मौर्य का केबिन व खाली कुर्सी।

डेढ़ साल पहले हुई थी अजय की नियुक्ति

जांच में यह भी सामने आया है कि तीनों आरोपियों ने एनएचएम के तहत संविदा नियुक्ति हासिल की थी और पिछले डेढ़ से ढाई वर्षों से हर महीने करीब 80-80 हजार रुपए वेतन ले रहे थे। अजय मौर्य अब तक 14 लाख से ज्यादा वेतन ले चुका था। अब सवाल स्वास्थ्य विभाग और एनएचएम अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे हैं कि आखिर दस्तावेजों का सत्यापन किए बिना इनकी नियुक्ति कैसे कर दी गई।

पुलिस गिरफ्त में फर्जी डॉक्टर अजय मौर्य।

पुलिस गिरफ्त में फर्जी डॉक्टर अजय मौर्य।

70 से अधिक फर्जी डिग्री का संदेह

पुलिस को आशंका है कि यह मामला केवल तीन फर्जी डॉक्टरों तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि मध्यप्रदेश में 70 से अधिक ऐसे लोग फर्जी डिग्री और मेडिकल रजिस्ट्रेशन के सहारे अलग-अलग जिलों में पदस्थ होकर मरीजों का इलाज कर रहे हो सकते हैं।

जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि फर्जी एमबीबीएस डिग्री और मेडिकल रजिस्ट्रेशन तैयार कराने के लिए बड़े स्तर पर पैसों का लेनदेन हुआ है। पुलिस अब उस नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जो कथित रूप से फर्जी डिग्री, जाली मेडिकल रजिस्ट्रेशन और सरकारी नियुक्तियां दिलाने का काम कर रहा था। दमोह एसपी आनंद कलादगी की टीम ने मामले की जांच तेज कर दी है।

मास्टरमाइंड हीरा सिंह गिरफ्तार

पुलिस ने इस पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड हीरा सिंह कौशल को भोपाल से गिरफ्तार कर लिया है। बुधवार रात दमोह एसपी ने इस बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए बताया कि आरोपी ने कई और लोगों के नाम बताए हैं, जिनकी तलाश में पुलिस की टीमें अलग-अलग जिलों के लिए रवाना हो गई हैं।

इंटरव्यू से होती है एनएचएम में भर्ती

एनएचएम के तहत डॉक्टरों की भर्ती वॉक-इन इंटरव्यू के माध्यम से की जाती है। प्रदेश में डॉक्टरों की भारी कमी के बीच जल्दबाजी में की गई संविदा भर्तियों का फायदा आरोपियों ने उठाया और इसका खामियाजा उन गरीब मरीजों को भुगतना पड़ा, जो सरकारी संजीवनी क्लीनिक्स में इलाज के भरोसे पहुंचते रहे।

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3 डॉक्टर्स ने 8-10 लाख में खरीदी MBBS की डिग्री

मध्य प्रदेश के दमोह में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। सरकारी आरोग्य केंद्र और संजीवनी क्लिनिक में काम कर रहे तीन फर्जी डॉक्टर पकड़े गए हैं। इनके पास मिली MBBS डिग्री और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया का रजिस्ट्रेशन फर्जी निकला। आरोपियों ने 8 से 10 लाख रुपए में फर्जी डिग्री खरीदी थी।पूरी खबर पढ़ें



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