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मध्य प्रदेश में बढ़ती गर्मी के साथ पेयजल संकट गहराता जा रहा है। कहीं महिलाएं जान जोखिम में डालकर कुओं में उतर रही हैं तो कहीं लोग सूखी नदी-नालों में झिरियां खोदकर मटमैला पानी पीने को मजबूर हैं। कई गांवों में लोग किलोमीटरों दूर से पानी ला रहे हैं, जबकि कुछ जगह नलों से बदबूदार और कीड़ों वाला पानी सप्लाई हो रहा है। दैनिक भास्कर के ग्राउंड जीरो रियलिटी चेक में प्रदेश के कई जिलों में चिंताजनक हालात सामने आए। खरगोन के टेमला गांव में एक महीने से जल संकट है। 5-6 दिन से नल सूखे हैं और तीन दिन में सिर्फ एक घंटे पानी मिल रहा है। नाराज ग्रामीणों ने चक्काजाम किया। सीहोर के रामगढ़ समेत कई गांवों में महिलाएं कुओं में उतरकर या सूखी नदियों में झिरियां खोदकर पानी जुटा रही हैं। कई जगह 2 किमी दूर से कपड़े से छानकर पानी लाना पड़ रहा है। बैतूल के हरिमऊ गांव में नल-जल योजना बंद है और हैंडपंप सूख चुके हैं। करीब एक हजार आबादी 5 किमी दूर गंदे कुएं के भरोसे है। महिलाएं-बच्चे घंटों लाइन में लग रहे हैं। रायसेन के कोकलपुर गांव में ग्रामीणों ने सरकारी कुएं पर दबंगों के कब्जे का आरोप लगाया है। 2 हजार आबादी को दिनभर में सिर्फ 3-4 कुप्पा पानी मिल रहा है। मंदसौर के कई इलाकों में डेढ़ महीने से नलों में कीड़े, कचरा और बदबूदार पानी आ रहा है। सतना के कई गांवों में लोग 2 किमी दूर से पानी लाने को मजबूर हैं। देखिए प्रदेश में जल संकट की तस्वीरें खबर के मिनट टू मिनट अपडेट के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
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प्यासा MP; पानी के लिए कुएं में उतर रही महिलाएं:देवास में पानी के लिए चक्काजाम, खरगोन में पंचायत का घेराव; बड़वानी में गधों से पानी की सप्लाई














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