बोकारो एसपी ऑफिस से 11 करोड़ रुपए की सरकारी राशि की अवैध निकासी मामले में सीआईडी की एसआईटी ने मुख्य आरोपी कौशल पांडेय को तीन दिनों की रिमांड पर लिया है। मंगलवार को एसआईटी उसे लेकर सीआईडी मुख्यालय रांची पहुंची। यहां बंद कमरे में उससे पूछताछ शुरू की। एसआईटी के अबतक के अनुसंधान में यह खुलासा हुआ है कि इस गबन के लिए कौशल पांडेय ने पूरी तरह से सोची-समझी साजिश के तहत सरकारी राशि की निकासी की। अगले 72 घंटों में एसआईटी मोडस ऑपरेंडी (काम करने के तरीके) ओर नष्ट किए गए सबूतों को लेकर पूछताछ करेगी। कौशल पांडेय ने सरकारी राशि की निकासी के लिए पूरी योजना के तहत काम किया। उसने दो तरह के बिल बनाए। एक फर्जी बिल और एक ओरिजनल बिल। उसने ओरिजनल बिल पर डीडीओ से राशि पास कराई। लेकिन बिल पास होने के बाद फर्जी बिल लगाकर अधिक राशि की निकासी की। इसे उन टेंपररी एकाउंट में ट्रांसफर कर दिया, जो उसने रिटायर्ड या उन नए बाल आरक्षी के नाम पर बनाया था, जिन्हें पीपीएफ नंबर नहीं मिला था। एसआईटी इनके बारे में ही कौशल पांडेय से पूछताछ कर रही है कि वह यह पूरा खेल कैसे करता था। इसमें उसके कौन-कौन से सहयोगी शामिल थे। यह भी पूछा जा रहा है कि जब बिल कई स्तरों से गुजरता है तो उसके फर्जी बिलों पर किसी की नजर क्यों नहीं पड़ी। उसके बनाए बिल सीधे डीडीओ की टेबल तक कैसे पहुंचते थे। बिल कहां फाड़े और डेटा कैसे उड़ाया, यह भी पूछेगी जांच में यह बेहद गंभीर बात सामने आई है कि जैसे ही पैसे फर्जी खातों में ट्रांसफर होते, कौशल पांडेय सबूतों को नष्ट कर देता था। उसने उन सभी फर्जी बिलों को फाड़कर फेंक दिया, जिनके आधार पर निकासी हुई थी। जिस कंप्यूटर के जरिए ये बिल जेनरेट किए गए थे, वहां से भी उसने सारी फाइलें डिलीट कर दी। इसपर भी एसआईटी उससे सवाल करेगी। कंप्यूटर से जो फाइलें डिलीट की गई हैं, उनका फॉर्मेट क्या था। इसपर भी सवाल जवाब होगा। निकासी की राशि कहां निवेश किया, ये भी होगा सवाल कौशल पांडेय ने सरकारी राशि की निकासी के बाद उसे कई खातों में ट्रांसफर किया। एसआईटी उससे यह भी सवाल करेगी कि उसने राशि कहां व किन लोगो को भेजे। उसके विभागीय सहयोगी को कितनी राशि गई। इस राशि को कहां निवेश किया गया। सरकार सख्त; वित्त मंत्री का निर्देश, सभी डीडीओ हटेंगे झारखंड के कई जिलों में पुलिस विभाग के भीतर वेतन मद में 35 से 40 करोड़ रुपए की अवैध निकासी के मामले में सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। वित्त मंत्री ने इस पूरे प्रकरण को लेकर अपर मुख्य सचिव, गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश दिया है कि जिन जिलों में यह घोटाला सामने आया है, वहां पदस्थापित निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों (डीडीओ) को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। वित्त मंत्री ने अपने पत्र में कहा है कि बोकारो, हजारीबाग, देवघर, चाईबासा और खूंटी जिलों में अवैध वेतन निकासी का मामला प्रकाश में आने के बाद वित्त विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए विभागीय जांच शुरू कर दी थी। इसी के तहत संबंधित जिलों में प्राथमिकी दर्ज कराने का भी निर्देश दिया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने भी कड़ा रुख अपनाया है और पूरे प्रकरण की व्यापक जांच के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। समिति ने अपनी जांच शुरू कर दी है और अंतिम प्रतिवेदन के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी सरकारी राशि की निकासी के लिए निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी अधिकृत होते हैं। उनके द्वारा ऑनलाइन विपत्र जारी कर हस्ताक्षर के बाद ही उसे कोषागार को भेजा जाता है। ऐसे में वेतन मद में हुई अवैध निकासी के लिए सीधे तौर पर डीडीओ की जिम्मेदारी बनती है। इसी आधार पर वित्त मंत्री ने निर्देश दिया है कि जब तक उच्च स्तरीय जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक जिन जिलों में यह मामला सामने आया है, वहां उस अवधि में पदस्थापित सभी डीडीओ को हटाकर उनका स्थानांतरण अन्यत्र किया जाए।
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एसआईटी पूछ रही नष्ट किए गए सबूतों और डिलीट फाइलों का राज










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