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सदर अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए करीब 25 लाख रुपए की लागत से बना वेटिंग हॉल और शौचालय पिछले 9 महीने से उद्घाटन के इंतजार में बंद पड़ा है। गेट पर ताला लटका है, मरीज के परिजन बदहाल व्यवस्था झेलने को मजबूर हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि शौचालय का रास्ता भी वेटिंग हॉल से होकर जाता है, इसलिए शौचालय भी इस्तेमाल से बाहर है। सदर अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 450 से 500 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें लगभग 150 मरीज दूरदराज के गांवों से आते हैं। लेकिन बंद रहने के कारण लोग जमीन पर बैठने, बरामदे में खड़े रहने या रातभर खुले बरामदे में सोने को मजबूर हैं। गर्मी और उमस के बीच मरीजों के साथ आए बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा परेशान हो रहे हैं। ओपीडी में घंटों इंतजार के दौरान बैठने की जगह तक नहीं मिल रही। वहीं शौचालय बंद होने से लोगों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। कई लोग मजबूरी में खुले में जाने को विवश हैं।
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ताले में कैद मरीजों की सुविधा, बरामदे में परिजन; खुले में शौच जाने को मजबूर










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