नवा रायपुर की ‘सेंध लेक’ का बदलेगा स्वरूप:30 करोड़ रु. से शुरू हुआ गहरीकरण, प्रवासी पक्षियों के लिए झील के बीच बनेगा ‘आईलैंड’




नवा रायपुर स्थित सेंध लेक को और अधिक आकर्षक व पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एनआरडीए ने बड़ी पहल शुरू की है। झील में जल संग्रहण क्षमता बढ़ाने के लिए गहरीकरण का कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके लिए लगभग 30 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया है और ठेका एजेंसी ने मौके पर काम भी प्रारंभ कर दिया है। इस परियोजना के तहत झील के बीचों-बीच पक्षियों के ठहराव के लिए विशेष आईलैंड भी विकसित किया जाएगा, जहां प्रवासी और स्थानीय पक्षी सुरक्षित रूप से बैठ सकेंगे। एनआरडीए से मिली जानकारी के अनुसार करीब 200 एकड़ में फैली सेंध लेक वर्तमान में नवा रायपुर और रायपुर शहर के लोगों के लिए प्रमुख पर्यटन और प्राकृतिक स्थल बन चुकी है। शहर की भीड़भाड़ और शोरगुल से दूर स्थित यह झील शांत वातावरण, हरियाली और ठंडी हवाओं के कारण लोगों को आकर्षित करती है। शेष|पेज11 शाम के समय यहां बड़ी संख्या में लोग परिवार और दोस्तों के साथ पहुंचते हैं। झील के किनारे बनी वॉकवे और ड्राइविंग ट्रैक इसे और भी खास बनाते हैं। एनआरडीए अधिकारियों के मुताबिक लंबे समय से झील के किनारों पर गाद जमा हो रही थी, जिससे इसकी जलधारण क्षमता प्रभावित हो रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए गहरीकरण का कार्य कराया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद झील में अधिक मात्रा में पानी संग्रहित हो सकेगा, जिससे भविष्य में जल संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। जानिए… इससे क्या होगा फायदा
गहरीकरण से मजबूत होगा ईको सिस्टम {झील में पानी की संग्रहण क्षमता बढ़ेगी {जल स्तर लंबे समय तक बना रहेगा {पक्षियों और जलीय जीवों को बेहतर प्राकृतिक वातावरण मिलेगा {झील के बीच बनने वाले आईलैंड पर प्रवासी पक्षियों को सुरक्षित ठहराव मिलेगा हरियाली और जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा {गर्मी के मौसम में आसपास के क्षेत्र का तापमान संतुलित रखने में मदद मिलेगी। जल संरक्षण के साथ पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा रायपुर से 30 किमी दूर सेंध लेक
सेंध लेक रायपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां सिटी बस और निजी वाहन दोनों से आसानी से पहुंचा जा सकता है। शाम के समय यहां का नजारा लोगों को खास तौर पर आकर्षित करता है, जहां ढलती शाम और चांद-तारों की रोशनी के बीच लोग प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेते हैं। सौंदर्यीकरण से सेंध लेक को ईको-टूरिज्म साइट के रूप में बदला जाएगा। सेंध लेक में जल संरक्षण क्षमता बढ़ाने के लिए गहरीकरण का कार्य कराया जा रहा है। समय के साथ झील के किनारों पर बड़ी मात्रा में गाद जमा हो गई थी, जो धीरे-धीरे अंदर की ओर फैल रही थी। इससे जल संग्रहण क्षमता प्रभावित हो रही थी। गहरीकरण के बाद झील की क्षमता बढ़ेगी और वहां का ईको सिस्टम भी बेहतर तरीके से संतुलित बना रहेगा। -चंदन कुमार, सीईओ एनआरडीए नवारायपुर



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