पीएनसी इन्फ्राटेक का काम रोकने की मांग:अनियमितताओं का आरोप, जिला पंचायत सदस्य-पार्षद ने महाप्रबंधक को पत्र लिखा, 5 दिन का अल्टीमेटम




कोरबा में एसईसीएल गेवरा प्रोजेक्ट में कार्यरत ठेका कंपनी पीएनसी इन्फ्राटेक लिमिटेड के काम को बंद करने की मांग की गई है। जिला पंचायत सदस्य-संचार-संकर्म समिति सभापति विनोद कुमार यादव और पार्षद सुजीत ने एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के महाप्रबंधक को पत्र लिखकर कंपनी पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। उन्होंने पांच दिन के भीतर कार्रवाई न होने पर काम बंद कराने की चेतावनी दी है। 21 मार्च 2026 को लिखे गए पत्र में विनोद कुमार यादव ने बताया कि पीएनसी इन्फ्राटेक कंपनी पिछले पांच माह से मिट्टी और कोयला उत्खनन का कार्य कर रही है। इस दौरान कंपनी में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। पत्र में आरोप लगाया गया है कि कंपनी में कार्यरत ड्राइवर, सुपरवाइजर, मशीन ऑपरेटर और हेल्पर सहित सभी कर्मचारियों की नाम-पते सहित सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है। क्षेत्रीय बेरोजगार युवाओं का आरोप है कि स्थानीय लोगों की उपेक्षा कर बाहरी व्यक्तियों को रोजगार दिया जा रहा है। एचपीसी दर और श्रमिक शोषण के आरोप इसके अलावा शिकायतें मिली हैं कि कोयला उत्खनन कार्य में लगे ड्राइवरों को सरकार की ओर से निर्धारित एचपीसी दर का भुगतान नहीं किया जा रहा है। कर्मचारियों से 12 घंटे काम लेकर उनका शोषण किया जा रहा है। विरोध करने पर उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है, और मारपीट कर दबावपूर्वक काम लेने के आरोप भी लगाए गए हैं। 5 दिन में समाधान नहीं होने पर काम बंद कराने की चेतावनी विनोद कुमार यादव ने पत्र में स्पष्ट किया है कि यदि पांच दिनों के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं किया गया और उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे खुद कंपनी का काम बंद कराएंगे। इसकी पूरी जवाबदारी एसईसीएल प्रबंधन, प्रशासन और कंपनी की होगी। इस पत्र की कॉपी कलेक्टर कोरबा, एसडीएम कटघोरा, तहसीलदार दीपका और थाना प्रभारी हरदी बाजार दीपका को भी भेजी गई है। स्थानीय युवाओं को रोजगार और श्रम कानून पालन की मांग जिला पंचायत सदस्य और पार्षद ने मांग की है कि कंपनी में कार्यरत सभी कर्मचारियों की सूची सार्वजनिक की जाए, स्थानीय प्रभावित गांवों के युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए और श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। इस मामले पर सोमवार को एक बैठक बुलाई गई है, जिसमें यदि कोई समाधान नहीं निकलता है तो उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई है।



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