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प्रयागराज में महिला आरक्षण बिल को लेकर रविवार को बीजेपी की महिला कार्यकत्रियों ने मार्च निकाल कर प्रदर्शन किया। संसद में महिला बिल पर विपक्षी दलों द्वारा विरोध और असहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए जाने से नाराज कार्यकत्रियों ने सांसद उज्जवल रमण के घर का घेराव किया। प्रदर्शनकारी महिलाएं उनके आवास के मुख्य द्वार के सामने बैठ गईं और धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान करीब 100 की संख्या में मौजूद महिलाओं ने सांसद के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने “उज्जवल रमण हाय-हाय”, “रेवती रमण हाय-हाय” और “महिला आरक्षण बिल पास करो” जैसे नारे लगाए। उनके हाथों में बैनर और तख्तियां भी थीं, जिनके जरिए उन्होंने बिल के समर्थन में अपनी मांग दोहराई। महिला कार्यकत्रियों का कहना था कि संसद में महिला सशक्तिकरण के लिए लाया गया यह बिल बेहद जरूरी है और इसका विरोध महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ है। सपा और कांग्रेस ने मिलकर इस बिल को फेल करने की कोशिश की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आने वाले दिनों में इससे भी बड़ा और उग्र धरना-प्रदर्शन करेंगी। महिला उपाध्यक्ष शोभा द्विवेदी ने कहा कि लोकसभा में बिल पेश किया था, उसको रद्द करने के लिए जिन विपक्षियों में नाम गए हैं, उनमें एक हमारे सांसद का भी नाम है। यह विपक्ष के होने के नाते और कांग्रेसी नेता होने के नाते, इन्होंने भी अपना सिग्नेचर (हस्ताक्षर) किया है—इस महिला अधिकारों को रद्द करने के लिए। ऐसा अधिकार किसी को नहीं है जो महिला अधिकारों को रोक सकता है। अगर इन्होंने महिलाओं के साथ ऐसा अन्याय किया है, तो यह गलत है। और यही कारण है कि आज हम इनके घर के सामने धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। बीना मिश्रा बोलीं कि आजादी के बाद लंबे समय तक कांग्रेस और प्रदेश में सपा की सरकारें रहीं, लेकिन किसी ने भी महिलाओं के जमीनी उत्थान के बारे में नहीं सोचा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं को घर के कोने-कोने से निकालकर उन्हें सम्मान और अधिकार दिलाने का काम किया है। प्रदर्शनकारी महिलाओं का मुख्य आक्रोश 33% महिला आरक्षण बिल को लेकर था। बीना मिश्रा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए इस महत्वपूर्ण बिल को विपक्ष ने एकजुट होकर बाधित किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की इसी ‘महिला विरोधी’ मानसिकता के कारण उन्हें सांसद के घर का घेराव करने पर मजबूर होना पड़ा। पार्षद सोनिका अग्रवाल का कहना है कि संसद में लिए जाने वाले निर्णयों पर देश की आधी आबादी की पैनी नजर है। उन्होंने प्रधानमंत्री के महिला सशक्तिकरण के विजन का समर्थन करते हुए कहा कि जब तक महिलाएं नीति-निर्धारण में शामिल नहीं होंगी, उनके अधिकारों की रक्षा नहीं हो पाएगी। उन्होंने सांसद पर तंज कसते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को ‘भेड़-चाल’ के बजाय अपने विवेक से निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि महिलाओं के हितों की अनदेखी की गई, तो आगामी चुनावों में इसका परिणाम भुगतना पड़ सकता है।
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प्रयागराज में भाजपा महिला कार्यकत्रियों का प्रदर्शन:सांसद उज्जवल रमण के घर का घेराव किया, महिला आरक्षण बिल पास करो के नारे लगाए















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