बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में चरवाह सम्मेलन:ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण, वन अग्नि रोकथाम के लिए किया जागरूक




उमरिया के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर बफर परिक्षेत्र की धौरखोह बीट में एक चरवाह सम्मेलन और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम पतरेई, ताली, सलैया, दुब्बार और धौरखोह गांवों में हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य वन अग्नि की रोकथाम, वन एवं वन्यजीव संरक्षण तथा मानव-वन्यप्राणी संघर्ष को कम करने के लिए ग्रामीणों और चरवाहों को जागरूक करना था। कार्यक्रम के दौरान, वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने ग्रामीणों को जंगल की आग से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने समझाया कि वन अग्नि से न केवल वन संपदा को क्षति पहुँचती है, बल्कि वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास भी बुरी तरह प्रभावित होता है। ग्रामीणों को जंगलों में सुरक्षित गतिविधियाँ अपनाने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि या वन्यजीव के संबंध में तत्काल वन विभाग को सूचित करने के लिए प्रेरित किया गया। वन अमले ने इस बात पर जोर दिया कि मानव और वन्यप्राणी संघर्ष की घटनाओं को कम करने में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे जंगलों में आग लगने जैसी किसी भी घटना की जानकारी तुरंत वन विभाग को दें और वन एवं वन्यजीव संरक्षण में अपना सक्रिय सहयोग प्रदान करें। जागरूकता बढ़ाने और उपयोगिता के उद्देश्य से कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों और चरवाहों को बॉटल कैप वितरित किए गए। सम्मेलन में ग्रामीणों ने वन संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा के प्रति सकारात्मक सहयोग देने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर परिक्षेत्र सहायक धौरखोह रोहिणी सिंह, बीट गार्ड दुब्बार छत्रसाल त्रिपाठी, बीट गार्ड धौरखोह अमन मिश्रा, बीट गार्ड पतरेई लोकेश कुशवाहा और बीट गार्ड बांधादेव विवेक मिश्रा सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे। ग्राम सलैया निवासी प्रमोद यादव ने बताया कि टाइगर रिजर्व के अधिकारियों और कर्मचारियों ने वनों की सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की है। उन्होंने कहा कि जंगलों के बिना जीवन संभव नहीं है और यदि कोई अवैध गतिविधि दिखाई देती है, तो उसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दी जाएगी। ग्राम पतरेई निवासी अशोक यादव ने इस पहल को सराहनीय बताया, जिसके तहत ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जंगलों को आग से बचाना और अवैध गतिविधियों की जानकारी बिना किसी डर के वन विभाग को देना सभी की जिम्मेदारी है।



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