रायसेन किले-अमरावत घाटी में बाघ की दस्तक, वन विभाग अलर्ट:पर्यटकों की एंट्री पर रोक, तेंदूपत्ता संग्राहको को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह




रायसेन शहर से सटे ऐतिहासिक किले और अमरावत घाटी क्षेत्र में बाघ की लगातार मौजूदगी दर्ज की जा रही है। वन विभाग को दोनों क्षेत्रों में बाघ के पगमार्ग मिले हैं, साथ ही कैमरे में भी टाइगर कैद हुआ है। इसके बाद वन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। एहतियात के तौर पर, वन विभाग ने रायसेन किले पर पर्यटकों और आम लोगों के जाने पर अस्थायी रोक लगा दी है। किले की ओर जाने वाले रास्तों पर वन अमला तैनात किया गया है। अमरावत घाटी और आसपास के जंगलों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है। वन विभाग के एसडीओ सुधीर पटले ने बताया कि बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किले पर चार और अमरावत घाटी सहित आसपास के क्षेत्रों में छह कैमरे लगाए गए हैं। कुल 10 कैमरों से लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। किले पर लगाए गए कैमरों में बाघ का मूवमेंट कैद हुआ है। एक फुटेज में बाघ मंदिर के सामने स्थित घाटी से उतरकर पानी पीने जाता हुआ दिखाई दिया। अमरावत घाटी के पास बनी नर्सरी क्षेत्र में भी बाघ की मौजूदगी के संकेत मिले थे, जिसके बाद विभाग ने सघन निगरानी शुरू की। करीब दो दिन पहले, किले पर मॉर्निंग वॉक करने पहुंचे लोगों को बाघ के स्पष्ट पगमार्ग दिखाई दिए थे। सूचना मिलने पर एसडीओ सुधीर पटले, रेंजर प्रवेश पार्टीदार और उनकी टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान टीम को बाघ के ताजा पगमार्ग मिले। इन दिनों क्षेत्र में तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य भी चल रहा है। इसे देखते हुए वन विभाग ने तेंदूपत्ता संग्राहकों और मजदूरों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। विभाग की टीम लगातार मुनादी कर लोगों से घने जंगलों में अकेले नहीं जाने और समूह में रहने की अपील कर रही है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।



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