‘मेरे मासूम ने किसी का क्या बिगाड़ा था? इतनी निर्दयता से मौत के घाट उतार दिया। कोई अपने रिश्तेदार पर कैसे भरोसा करेगा। आरोपियों को फांसी होना चाहिए, तभी हमें न्याय और बेटे की आत्मा को शांति मिलेगी।’
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यह पीड़ा बताते हुए पूजा नायक शांत हो जाती हैं। 5 मई को पूजा के 6 साल के बेटे उत्कर्ष नायक की फावड़े से वार कर हत्या कर दी गई थी। उनकी सास रमिला बाई (55) की हालत गंभीर है।
आरोपी उनके ही भांजे जितेंद्र और चिराग हैं। जितेंद्र भोपाल में प्राइवेट कॉलेज से बीएचएमएस की पढ़ाई कर रहा है। वहीं, चिराग उसके साथ रहता था। एसडीओपी अनुरक्ति साबनानी 20 मई को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। कोर्ट में पेश कर तीन रिमांड में लिया गया है।
दैनिक भास्कर ने उत्कर्ष के परिजन और एसपी देवेंद्र पाटीदार से बात कर मामले की तह तक जाने की कोशिश की। इसमें जो कहानी सामने आई, वह चौंकाने वाली है। पढ़िए रिपोर्ट…

दादी को नहीं बताया, पोता नहीं रहा
झाबुआ जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर पेटलावद–थांदला स्टेट हाइवे पर उन्नई गांव के पास कोदली गांव के लिए रास्ता जाता है। मुख्य सड़क से पांच किमी आगे सड़क से लगा गांव है। गांव के बाहर एक शख्स से पूछा, तो उन्होंने उत्कर्ष का घर बता दिया। गली के आखिर में तीन मंजिला मकान है। ग्राउंड फ्लोर पर कुशल सिंह अपनी पत्नी रमिलाबाई के साथ रहते हैं। ऊपर के दो फ्लोर अंडर कंस्ट्रक्शन हैं। प्लास्टर हो चुका है। बगल में टीन शेड की दुकान भी है।
घर के बाहर गांव की महिलाएं और रिश्तेदार मौजूद हैं। बुधवार को ही परिवारवाले दादी रमिलाबाई को डिस्चार्ज करवाकर लाए हैं। वे पिछले 15 दिन से गुजरात के बड़ोदरा अस्पताल में भर्ती थीं। उनकी हालत अभी स्थिर है। डॉक्टराें के मुताबिक दायीं आंख से कभी नहीं देख सकतीं। जबड़ा बंधा होने से फिलहाल बोल भी नहीं सकती हैं। आंखें भी थोड़ी–बहुत खोल पाती हैं। कुछ बताना होता है, तो जैसे–तैसे लिखकर बताती हैं। उत्कर्ष के पिता शैलेंद्र कहते हैं कि इलाज में अभी तक 10 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। दादी को अभी तक यह नहीं बताया कि पोता इस दुनिया में नहीं रहा।

20 मई को ही रमिलाबाई बड़ोदरा के अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर लौटी हैं।
आरोपी बोले – फावड़ा मारकर बच्चे को मारा, फिर दादी पर वार
एसपी देवेंद्र पाटीदार ने बताया कि आरोपी जितेंद्र और चिराग को गिरफ्तार कर क्राइम सीन पर ले गए थे। 20 मई को ही आरोपियों को क्राइम सीन पर लाया गया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि 5 मई की दोपहर करीब ढाई बजे वारदात के इरादे से जितेंद्र अपने मामा कुशल सिंह के घर पहुंचा। घर पर उत्कर्ष और नानी रमिलाबाई मौजूद थे। कुछ देर बैठने के बाद जितेंद्र ने मोबाइल से मैसेज करके चचेरे भाई चिराग को भी बुला लिया।
रमिलाबाई किचन में चाय बनाने लगीं। इतने में दोनों उत्कर्ष का मुंह दबाकर ऊपर ले गए। यहां फावड़े से वार कर बच्चे की हत्या कर दी। आवाज सुनकर दादी ऊपर की ओर दौड़ीं। उन्होंने कहा कि उत्कर्ष को करंट लग गया है। वह ऊपर आ पातीं, इससे पहले ही जितेंद्र नीचे की ओर दौड़ा। ऊपर की ओर जाते समय जितेंद्र पीछे–पीछे चल दिया। दादी ने मुड़कर देखा, तो जितेंद्र के हाथ में फावड़ा था। वह वार करने लगा। दादी ने पूछा कि क्यों मार रहे, इतने में उसने चेहरे और सिर पर दो–तीन वार कर दिए।

दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
कान के टॉप्स नोंचे, अलमारी से गहने निकालकर भागे
आरोपियों ने रमिलाबाई को मरा हुआ समझकर उनके कान से सोने के टॉप्स नोंच लिए। नीचे कमरे में जाकर अलमारी से सोने–चांदी के जेवर भी निकाल लिए। दूसरी अलमारी का ताला नहीं खुला, तो उसे वहीं छोड़ दिया। पीछे के दरवाजे से दोनों भाग गए। रमिला के घर के पास उनकी बहन सुगनबाई रहती हैं। जितेंद्र अपनी नानी और चिराग अपने घर चला गया। करीब 20 मिनट बाद सुगनबाई घर पहुंची। उन्होंने घटना के बारे में गांव वालों को बताया।
पिता बोले- बिना पीएम शव घर लाए
बच्चे के पिता शैलेंद्र नायक मूल रूप से कोदली गांव के रहने वाले हैं। खुद काकनवानी गांव में कीटनाशक की दुकान हैं। यहां पति–पत्नी और बेटे उत्कर्ष के साथ रहते हैं। बेटा यहां पहली क्लास में पढ़ता था। शैलेंद्र ने बताया कि 25 अप्रैल को बेटा दादी–दादी के यहां आया था। 5 मई को बच्चे के दादा कुशल सिंह अपनी ड्यूटी पर गए थे। हम लोग गांव में थे।
इसी दौरान, दोपहर करीब 3:30 बजे कॉल आया कि बेटे को करंट लग गया है। दादी को भी चोट लगी है। हम पेटलावद सिविल अस्पताल पहुंचे। यहां बेटे को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। दादी को गुजरात के बड़ोदरा रेफर कर दिया था। कुछ समझ नहीं आ रहा था। डॉक्टरों ने शव का पोस्टमार्टम करवाने के लिए कहा, लेकिन गांव वालों के कहने पर मना कर दिया। बेटे के शव को बिना पीएम कराए घर लेकर आए। मां को बड़ोदरा के अस्पताल लेकर गए।

परिवार वालों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।
दादा बोले– सिर के पीछे खून देखकर हुआ शक
बच्चे के दादा कुशल सिंह पेशे से शिक्षक हैं। पोते की मौत के बाद से सदमे में हैं। उन्होंने बताया कि वारदात वाले दिन गुजरात शादी में गया था। शाम करीब 4 बजे कॉल आया कि पोते को करंट लग गया है। बिना सोचे–समझे सीधा गांव के लिए निकला। शाम करीब 6 बजे घर पहुंचा। घर पर अर्थी सज गई थी। रिश्तेदारों ने घर के अंदर से शव को अर्थी पर रख दिया था। मैंने बच्चे के गाल पर हाथ फेरा। हाथ खून से सन गया। चेहरे पर भी घाव के निशान थे। मुझे शक हुआ। दौड़कर ऊपर की ओर गया। सोचा कि करंट आने पर खून कैसे निकल सकता है। वहां खून फैला हुआ था।
थोड़ी देर में लौटे, तब तक गांव वाले अर्थी सजाकर जाने लगे थे। हालत बदहवास जैसी थी। श्मशान के रस्ते में माथा ठनका कि यह दुर्घटना नहीं, बल्कि मर्डर हो सकता है। मुक्तिधाम पहुंचने से पहले लोग मुक्तिधाम में लकड़ियां बिछा चुके थे। सिर्फ शव को लिटाने की देर थी। इतनी जल्दबाजी को लेकर शक यकीन में बदल गया। मैंने रिश्तेदार के माध्यम से पुलिस को सूचना दिलवाई। 10 मिनट में पुलिस पहुंच गई। अंत्येष्टि रुकवा कर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। इसके बाद दूसरे दिन अंतिम संस्कार किया गया।
तीन–चार दिन तक सांत्वना देते रहे आरोपी
कुशल सिंह ने बताया कि जांच के दौरान घर से गायब हुए आभूषणों के बारे में पता चला। पोते को खाने के बाद घायल पत्नी को बचाने की कोशिश दिमाग में चलती रही। चिराग और जितेंद्र और उनके परिवार वाले वारदात वाले दिन से लेकर चार दिन तक लगातार सांत्वना देने घर आते रहे। इस बीच, फॉरेंसिक व डॉग स्कॉड टीम ने भी मौका मुआयना किया। पीएम रिपोर्ट आने के बाद हत्या का केस दर्ज हुआ, तो उनका आना–जाना बंद हो गया।

दादी ने दिया सुराग, तब पकड़े आरोपी
वारदात के 11 दिन बाद घायल रमिलाबाई ने कागज पर लिखकर जितेंद्र और चिराग का नाम बताया। घटनाक्रम में रमिलाबाई का नाती यानी बहन सुगनबाई की बेटी उमा का बेटा जितेंद्र है। पिता का देहांत बचपन में हो गया था। बच्चे की अंत्येष्टि के दूसरे दिन दोनों भोपाल चले गए। इसके बाद पुलिस ने जितेंद्र को भोपाल से पकड़ लिया। उसकी निशानदेही पर चिराग को पकड़ा। दोनों ने पूछताछ में पूरी कहानी बता दी। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे महंगे शौक और ऐशो-आराम के लिए पैसों की तंगी से जूझ रहे थे, जिसके चलते उन्होंने मौसी के घर लूट की योजना बनाई।
पिछले पांच दिन से लगातार घर आ रहा था आरोपी
पूछताछ में पता चला कि जितेंद्र भोपाल में किसी लड़की के प्यार में पड़ गया था। उसके साथ लिव इन में भी रहने लगा। इसी बीच, बीएचएमएस करने दौरान नशे की लत भी पड़ गई। यह देखकर घरवालों ने खर्च में कटौती कर दी। गर्लफ्रेंड और खुद के खर्च के लिए शेयर बाजार और दूसरे रस्ते अपनाए, लेकिन निराशा मिली।
वारदात के अंजाम देने के लिए पहले से ही प्लान बना लिया था। परिवारवालों का कहना है कि इससे पहले जितेंद्र ज्यादा घर नहीं आता था। पिछले एक हफ्ते से लगातार घर आ रहा था। चूंकि भांजा लगता था, इसलिए किसी को शक भी नहीं हुआ कि उसका इरादा कुछ और है।
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महंगे शौक-ऐशो आराम के लिए की मासूम की हत्या
झाबुआ जिले के पेटलावद थाना क्षेत्र के कोदली ग्राम में 5 मई को एक 6 साल के बच्चे की फावड़े से वार कर हत्या कर दी गई। पुलिस ने आज बुधवार को पूरे मामले का खुलासा किया है। पढ़ें पूरी खबर
















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