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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लोकायुक्त के खिलाफ 16 मार्च 2026 को की गई अपनी सख्त टिप्पणी वापस ले ली है। न्यायालय को बताया गया कि जिस आदेश को लेकर यह टिप्पणी की गई थी, वह लोकायुक्त ने नहीं बल्कि उप-लोकायुक्त ने जारी किया था। इसके बाद न्यायालय ने यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अब मामले में लोकायुक्त की जगह उप-लोकायुक्त को पक्षकार बनाया जाए। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने मोहम्मद सलीम की जनहित याचिका पर दिया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि खीरी जिले में तैनात एक ग्राम विकास अधिकारी ने एक करोड़ रुपये से अधिक सरकारी धन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी फुरकान अली के निजी खाते में दो बार ट्रांसफर कर दिया था। शिकायत में कहा गया कि पहली बार हल्की कार्रवाई होने के कारण उसने दोबारा ऐसा किया। दोबारा ऐसा करने पर मामले की शिकायत लोकायुक्त से की गई थी। हालांकि, लोकायुक्त कार्यालय ने यह कहते हुए शिकायत बंद कर दी कि पुराने मामले में विभागीय सजा पहले ही मिल चुकी है। इस मामले पर हाईकोर्ट ने पहले कड़ी टिप्पणी की थी। बाद में सुनवाई के दौरान लोकायुक्त की ओर से न्यायालय को स्पष्ट किया गया कि संबंधित आदेश लोकायुक्त ने नहीं, बल्कि उप-लोकायुक्त ने पारित किया था। यह स्पष्टीकरण मिलने के बाद कोर्ट ने अपनी पुरानी टिप्पणी वापस ले ली। मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को निर्धारित की गई है।
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लोकायुक्त पर की गई सख्त टिप्पणी हाईकोर्ट ने वापस ली:कोर्ट को बताया गया, आदेश उप-लोकायुक्त ने दिया था














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