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करोड़ों की लागत से बने हरदोई मेडिकल कॉलेज का इमरजेंसी वार्ड भीषण गर्मी में टिन शेड के नीचे संचालित हो रहा है। 43 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच मरीज और उनके तीमारदार पसीने से तरबतर होने को मजबूर हैं। करोड़ों की लागत से बनी इमारतों के बावजूद, यह स्थिति मरीजों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। वहीं सभी डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ एसी से सुसज्जित रूम में बैठते हैं। सूरज की तपिश के कारण टीन शेड के नीचे कूलर और पंखे भी गर्म हवा दे रहे हैं। जिससे मरीज और उनके तिमार दार परेशान हैं।मेडिकल कॉलेज में कुल 55 इमरजेंसी बेड हैं। इनमें से 14 बेड ट्रायज एरिया में हैं, जो टिन शेड के नीचे है। इसके अलावा, ग्रीन जोन के 11 बेड भी टिन के नीचे ही संचालित किए जा रहे हैं। गंभीर मरीजों को सबसे पहले ट्रायज एरिया में ही लाया जाता है, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें अन्य वार्डों में स्थानांतरित किया जाता है। हालांकि, बेड की अनुपलब्धता के कारण कई बार मरीज पूरे दिन ट्रायज एरिया में ही रहते हैं। तीमारदारों को टिन शेड के नीचे इलाज कराना पड़ रहा पिछले छह दिनों से हरदोई में तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस और शनिवार को करीब 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इस भीषण गर्मी में दुर्घटना या गंभीर बीमारी से पीड़ित होकर मेडिकल कॉलेज पहुंचने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को टिन शेड के नीचे इलाज कराना पड़ रहा है। यहां लगे कूलर और पंखे भी गर्म हवा दे रहे हैं, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ जाती है। कॉलेज परिसर में आईपीडी भवन लगभग 27 करोड़ रुपये के बजट से बनाया गया है। इसके अतिरिक्त ओपीडी और हॉस्टल की इमारतें भी मौजूद हैं। इमरजेंसी वार्ड के प्रभारी डॉ. अमित आनंद ने बताया कि ट्रायज एरिया के टिन शेड के नीचे संचालित होने की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी जा चुकी है और जल्द ही इसका समाधान निकाला जाएगा।
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हरदोई मेडिकल कॉलेज का इमरजेंसी वार्ड टिन शेड में संचालित:43 डिग्री सेल्सियस की गर्मी में मरीज टिन शेड के नीचे लेटने को मजबूर















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