शहीद की पत्नी का दर्द:बिहार सरकार ने घोषणा के बाद भी न मुआवजा दिया, न ही नौकरी; झारखंड की बेटी हूं, पर मुझे यहां भी सहारा नहीं मिला: अंजलि




ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बिहार के सीवान जिले के सैनिक रामबाबू सिंह 12 मई को शहीद हो गए थे। पहली बरसी पर मंगलवार को पत्नी अंजलि ने धनबाद के डिगवाडीह स्थित मायके में चंद परिजनों संग पति की शहादत को नमन किया। भास्कर रिपोर्टर कन्हैया सिंह से बातचीत में उन्होंने रुंधे गले से तब बिहार सरकार की ओर से किए गए वादों और अब हो रही अनदेखी की भी चर्चा की। 12 मई 2025 इस दिन को कभी भूल नहीं सकती। खबर मिली थी कि पति रामबाबू सिंह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हो गए। एक पल में मेरी दुनिया उजड़ गई। शादी को कुछ ही महीने हुए थे। 4 माह की गर्भवती थी। मायके में रह रही थी। पति के अंतिम दर्शन के लिए सीवान जिले के बड़हरिया प्रखंड के वसीलपुर गांव स्थित ससुराल पहुंची। अंतिम यात्रा में बड़ी भीड़ उमड़ी। कई नेता भी आए। वादा किया गया कि बिहार सरकार मेरी और मेरे होने वाले बच्चे की जिम्मेदारी उठाएगी। 50 लाख रुपए की मदद और नौकरी देने की घोषणा हुई। आठ माह की बेटी संग मायके में रहने को मजबूर पति के जाने के बाद ससुराल वालों का व्यवहार भी बदल गया। अगस्त 2025 में धनबाद में बेटी हुई। ससुराल से कोई देखने तक नहीं आया। कुछ दिनों बाद बेटी को लेकर ससुराल गई, तो सास मायके चली गईं। भैंसुर अपनी नौकरी पर हजारीबाग रोड में थे। मजबूरी में मायके लौट आईं। तब से 8 माह की बेटी के साथ यहीं रह रही हूं। इस दौरान ससुराल से किसी ने एक फोन तक नहीं किया। अंजलि परिवार का हिस्सा, उसे सीवान वाले घर की चाबी दी है अंजलि हमारे परिवार का हिस्सा हैं। हमने सीवान वाले घर की चाबी उन्हें दी है। मां बीमारी की वजह से वहां नहीं रहतीं। कभी मेरे पास तो कभी मायके में रहती हैं। -अखिलेश कुमार, रामबाबू सिंह के बड़े भाई रामबाबू की शहादत पर गर्व रामबाबू की शहादत पर हमें गर्व है। बिहार-झारखंड सरकार से बात कर शहीद की पत्नी को हरसंभव मदद दिलाने का प्रयास करेंगे। -संजय सेठ, रक्षा राज्य मंत्री



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