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झारखंड का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल रिम्स खून के संकट से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि राज्य के एकमात्र मॉडल ब्लड बैंक का स्टॉक 50 यूनिट के नीचे पहुंच जा रहा है। बुधवार को भी यहां 70 यूनिट खून उपलब्ध था। हालांकि रिप्लेसमेंट के आधार पर 98 यूनिट खून की सप्लाई की गई। इसका सीधा असर ऑपरेशन पर पड़ रहा है। खून उपलब्ध न होने के कारण गंभीर मरीजों की सर्जरी टालनी पड़ रही है। रोजाना औसतन 20 डिमांड पर्ची लेकर मरीज के परिजन ब्लड बैंक पहुंच रहे हैं। लेकिन इनमें आधे को उस दिन खून उपलब्ध नहीं हो पाता। बुधवार को 17 लोग ऑपरेशन के लिए खून लेने पहुंचे। इनमें से नौ लोगों को खून मिला। आठ लोगों की सर्जरी टालनी पड़ी। हालात ऐसे हैं कि बिना रिप्लेसमेंट (खून के बदले खून) के आपूर्ति करना ब्लड बैंक के लिए मुश्किल हो गया है। यही नहीं, कई ग्रुप के खून आउट ऑफ स्टॉक हैं। ब्लड बैंक में कुछ ऐसी डिमांड पर्ची मिली, जिसमें प्लांड ऑपरेशन लिखा था और दो-तीन दिन से वहां जमा है। हर विभागों में लगने थे ब्लड डोनेशन कैंप, 2-3 में ही लगे स्वास्थ्य विभाग ने राज्य में खून की कमी को देखते हुए निर्देश दिया था कि हर विभागों में, कार्यालयों में, स्कूल व कॉलेजों आदि में नियमित रूप से ब्लड डोनेशन कैंप लगाए जाएंगे। लेकिन यह निर्देश फेल साबित हो गया। स्वास्थ्य विभाग ने विभागीय स्तर पर कुछ कैंप लगाए, एक-दो अन्य विभागों ने भी इस अपील पर हिस्सा लिया। लेकिन इसके बाद ब्लड की कमी से ध्यान हट गया। नतीजा रिम्स जैसे मॉडल ब्लड बैंक में पूर्व में 120 यूनिट से ज्यादा प्रतिदिन सप्लाई होती थी, अभी रिप्लेसमेंट पर निर्भर होकर भी मुश्किल से 80 से 100 यूनिट तक की सप्लाई हो पा रही है। जबकि स्टॉक में आंकड़ा 50 यूनिट से भी नीचे पहुंच जा रहा है। इन विभागों में टल रही है सर्जरी सर्जरी विभाग: 4 सर्जरी
न्यूरोसर्जरी विभाग: 3 सर्जरी
सीटीवीएस विभाग: 2 सर्जरी
सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग: 2 सर्जरी
यूरोलॉजी विभाग: 2 सर्जरी
ऑर्थोपेडिक विभाग: 4 सर्जरी। इनमें से नौ को बुधवार शाम खून मिल पाया। दो केस स्टडी से समझिए…कैसे परेशान हो रहे मरीज विभाग का निर्देश फेल… धनबाद में भी खून की कमी के कारण 11 ऑपरेशन टले इधर, शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एसएनएमएमसीएच) के ब्लड बैंक में भी खून की कमी हो गई है। बुधवार तक ब्लड बैंक में मात्र 8 यूनिट खून उपलब्ध था। इनमें बी पॉजिटिव के 5, ओ निगेटिव ग्रुप के 2 और ओ पॉजिटिव ग्रुप का सिर्फ 1 यूनिट शामिल है। स्थिति इतनी गंभीर है कि पिछले एक सप्ताह में खून की कमी के कारण 11 ऑपरेशन तय तिथि पर नहीं हो सके और उन्हें अगले दिन करना पड़ा। अस्पताल में स्टॉक नहीं रहने से मरीजों को तत्काल ब्लड उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। थैलेसीमिया पीड़ितों की परेशानी भी बढ़ गई है। परिजन डोनर खोजकर ला रहे हैं या समाजसेवियों के सहयोग से रक्त की व्यवस्था हो पा रही है। बुधवार को भी 10 से अधिक मरीज ब्लड मिलने का इंतजार करते रहे। पर्ची जमा है, पर नहीं मिल रहा खून दो दिन प्रयास के बाद मिला खून
बुधवार को मात्र 70 यूनिट खून उपलब्ध था ऑर्थोपेडिक विभाग में भर्ती मरीज विजय लक्ष्मी देवी के पैर की सर्जरी होनी है। डॉक्टर ने एक यूनिट ब्लड की व्यवस्था करने को कहा है। परिजनों ने ब्लड बैंक में पर्ची जमा कर रखी है। लेकिन स्टॉक न होने के कारण बुधवार शाम तक भी उन्हें खून नहीं मिल सका। इस मरीज की पर्ची ब्लड बैंक में मिली, जिसपर डॉक्टरों द्वारा ओटी प्लांड लिखा हुआ था। राहिल मिंज को चार दिन पहले सर्जरी विभाग में भर्ती किया गया था। परिजनों के मुताबिक उसे पेट की समस्या थी। डॉक्टर ने बुधवार को सर्जरी की तारीख दी थी। इससे पहले खून की व्यवस्था करने को कहा था। वे मंगलवार से ही खून का इंतजार कर रहे थे। आखिरकार बुधवार शाम छह बजे उन्हें खून मिला। परिजन परेशान थे कि अब पता नहीं डॉक्टर ऑपरेशन करेंगे या आज भी टाल देंगे।
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रिम्स के ब्लड बैंक में खून की कमी, कई ग्रुप का स्टॉक नहीं, 8 ऑपरेशन टले













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