![]()
गोरखपुर के कुसम्ही जंगल में सुसाइड करने वाले इंजीनियर प्रदुम्मन यादव के मामले में एम्स थाना पुलिस ने उनकी पत्नी अर्पिता यादव उर्फ उषा को गिरफ्तार कर लिया। रविवार दोपहर पुलिस ने उसे हिरासत में लिया और शाम को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। कुशीनगर जिले के स्वामी विवेकानंद नगर (बेलवा पल्कधारी सिंह) निवासी 33 वर्षीय इंजीनियर प्रदुम्मन यादव ने 14 मई की शाम कुसम्ही जंगल स्थित बुढ़िया माता मंदिर के पास फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना से पहले उसने मोबाइल फोन से वीडियो बनाकर अपनी पीड़ा जाहिर की थी। वीडियो में उसने अपनी मौत के लिए पत्नी को जिम्मेदार ठहराया था। उसने बड़े भाई से माफी मांगते हुए माता-पिता का ध्यान रखने की अपील भी की थी। आत्महत्या के बाद प्रदुम्मन के बड़े भाई राघवेंद्र यादव ने शनिवार को एम्स थाने में तहरीर देकर पत्नी अर्पिता, सास और ससुर के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज कराया था। परिजनों के मुताबिक, प्रदुम्मन की शादी करीब सात वर्ष पहले तुर्कपट्टी खेत्र के सोहग गांव में रहने वाली अर्पिता से हुई थी। उनकी पांच वर्ष की एक बेटी भी है। पति से विवाद होने की वजह से अर्पिता पिछले तीन वर्षों से मायके में रह रही थी। परिवार का आरोप है कि इसी वजह से प्रदुम्मन मानसिक तनाव में था और अवसाद में चला गया था। मां बोलीं- आखिरी बार बेटे से मिल भी नहीं पाई साहब मेरा बेटा अब नहीं रहा। तीन महीने पहले देखा था। उससे आखिरी बार भी नहीं मिल पाई। गांव के एक लड़के ने फेसबुक पर उसका वीडियो दिखाया, तबसे मुझे चैन नहीं है। कैसे भूलूंगी उसे… काश वह मुझे भी साथ ले जाता। ये दर्द कुशीनगर के सुसाइड करने वाले जवान इंजीनियर की मां का है। प्रद्युम्न यादव (33) की मां रोते हुए कहती हैं कि बहू की प्रताड़ना से परेशान बेटे ने जान दे दी। उसने गुरुवार को पहले मंदिर में पूजा की। फिर वहीं लगे पेड़ पर फंदे से लटक गया। सुसाइड से पहले उसने वीडियो बनाकर व्हाट्सऐप स्टेटस लगाया था। इंजीनियर बेटे के परिवार का दर्द जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम कुशीनगर जिला मुख्यालय से दूर कसयां तहसील पहुंची। यहां प्रद्युम्न के घर से महिलाओं के रोने की आवाज आ रही थी। हमने उसके घरवालों और पड़ोसियों से बातचीत की। पढ़िए रिपोर्ट… मां रोते-रोते बोली- राजा बेटा चला गया
प्रद्युम्न की मां कलावती देवी (72) को घर की महिलाएं और बेटियां संभाल रही थीं। वह बार-बार बेसुध हो जा रही थीं। घर से बाहर मेन दरवाजे पर आकर रोते-रोते कहतीं- ‘मेरा राजा बेटा चला गया’ घर की ओर आने वाले रास्ते की ओर देखतीं। जैसे उन्हें अब भी प्रद्युम्न के आने की आशा हो। बेटे को खोने का दर्द आंसू बनकर बह रहा था। रोते-बिलखते हुए मां कलावती ने कहा, साहब मेरा बेटा अब नहीं रहा। तीन महीने पहले गांव के एक लड़के ने फेसबुक पर उसका आखिरी वीडियो दिखाया था। वो तो नहीं रहा। इस घर में सिर्फ उसकी यादें ही बची हैं। बहन बोली- भाई की मौत के बाद तो उसे न्याय मिले
मां के बगल में बैठी बहन पूनम की आंखें भी नम थीं। उन्होंने भरे हुए गले से कहा- हमारे घर का सोना चला गया। मेरा भाई बहुत सीधा था, सबसे मिल-जुलकर रहता था। उसे कभी चैन से जीने नहीं दिया गया। बस यही चाहती हूं कि जीते-जी नहीं मिला तो मरने के बाद मेरे भाई को न्याय जरूर मिले। भाई बोले- उसके काम को देखकर प्रमोशन मिला था
प्रद्युम्न के भाई राघवेंद्र सिंह यादव ने कहा- मेरा भाई इंजीनियर था। ऑटोमोबाइल सेक्टर में काम करता था। उसकी शुरुआत गुड़गांव से हुई थी। इस समय मध्य प्रदेश की एक कंपनी में नौकरी कर रहा था। कितना कमाता था इस पर मैं ज्यादा बात नहीं करना चाहता, क्योंकि जो लड़का पहले से इतना परेशान हो, उससे हम और क्या उम्मीद रखते। हम लोग खेती-किसानी करके घर चलाते हैं। पिताजी 2007 में डेयरी डेवलपमेंट ऑफिसर पद से रिटायर हुए थे। भाई ने शुरुआती पढ़ाई कुशीनगर में की थी। उसके काम और अनुभव को देखते हुए मौजूदा कंपनी में उसे प्रमोशन भी मिला था। यह बताते-बताते राघवेंद्र रुक गए, उनका गला भर आया। कुछ देर बाद बोले- उसकी पत्नी अर्पिता ने भरण-पोषण का केस किया था। केस में पडरौना कोर्ट में सुनवाई थी। प्रद्युम्न इसी केस के लिए 10 मई को इंदौर से कुशीनगर आए थे। कोर्ट में सुनवाई के बाद अगली तारीख 21 जुलाई पड़ी। प्रद्युम्न बेहद तनाव में थे। केस के लिए उन्हें बार-बार छुट्टी लेकर आना पड़ता था। उसी केस की आखिरी सुनवाई में उसके ऊपर 125 का खर्चा बहाल हुआ था। आठ हजार रुपए महीना देना था। फिर लगभग 3 लाख 84 हजार रुपए की वसूली तय हुई। उसी को लेकर वारंट जारी हुआ था। इसके बाद वह भागा-भागा फिर रहा था। पढ़िए, प्रद्युम्न ने वीडियो में क्या कहा था…
हार गया यार जिंदगी की जंग। बहुत दुख देखे हैं। दुख देने वाला कोई और नहीं, मेरी वाइफ है। सभी लोगों से रिक्वेस्ट है- कोई यह मत बोले कि बेसमय चला गया। मेरे जाने का अभी समय नहीं था। पिछले एक-डेढ़ महीने से मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि बेटा, सुसाइड कर ले। ठीक है, आज वह समय आ गया। मैं अपने बड़े भाई को एक संदेश देना चाहता हूं। भाई, कभी मां-बाप को यह एहसास मत होने देना कि एक बेटा दुनिया से चला गया। हालांकि, मैं गलती तो कर रहा हूं। हर मां-बाप को लगता है कि बुढ़ापे में बेटा सहारा बनेगा, लेकिन मैं सहारा न बनकर बहुत दुख दे रहा हूं। मैं इस समय जा रहा हूं तो मुझे पता है कि उन्हें कितनी पीड़ा होगी, लेकिन अपने दर्द के आगे उनकी पीड़ा भूल जा रहा हूं। पूरी घटना सिलसिलेवार पढ़िए… गोरखपुर में गुरुवार को इंजीनियर का शव जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर कुसुम्ही जंगल में लटका मिला। इंजीनियर प्रद्युम्न यादव कुशीनगर के रहने वाले थे। वह मध्य प्रदेश की एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते थे। 9 साल पहले उनकी शादी हुई थी। पिछले 6 साल से पत्नी से विवाद था। इसका मुकदमा कुशीनगर कोर्ट में चल रहा था। 12 मई को सुनवाई थी। इसके लिए इंजीनियर प्रद्युम्न यादव इंदौर से आए थे। प्रद्युम्न कुमार कुशीनगर नगर पंचायत के स्वामी विवेकानंद नगर के रहने वाले थे। पिता का नाम उमापति यादव (78) और मां का नाम कलावती देवी (72) है। इंजीनियर प्रद्युम्न की 2 जून 2017 को तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के सोहाग गांव निवासी हरिशंकर यादव की बेटी अर्पिता यादव से शादी हुई थी। दोनों की एक 5 साल की बेटी भी है। प्रद्युम्न के भाई राघवेंद्र के अनुसार, अर्पिता शादी के बाद 3 महीने ससुराल में रही, लेकिन उसके बाद मायके चली गई। करीब 4 महीने बाद वह ससुराल आई, तो प्रद्युम्न उसे लेकर दिल्ली चले गए। उस समय वह दिल्ली में जॉब करते थे। परिजनों के अनुसार, पत्नी ने दिल्ली में पति का गला दबाकर जान लेने की कोशिश की। इसके बाद पति ने उसे मायके भेज दिया। अर्पिता जब मायके वापस गई, तो उसने पति पर दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज करा दिया। इसके अलावा भरण-पोषण का मुकदमा भी कर दिया। इस मामले में सुनवाई चल रही थी भाई राघवेंद्र के अनुसार, 12 मई को अर्पिता के भरण-पोषण वाले केस में पडरौना कोर्ट में सुनवाई थी। प्रद्युम्न इसी केस के लिए 10 मई को इंदौर से कुशीनगर आए थे। कोर्ट में सुनवाई के बाद अगली तारीख 21 जुलाई पड़ी। प्रद्युम्न बेहद तनाव में थे। केस के लिए उन्हें बार-बार छुट्टी लेकर आना पड़ता था। सुनवाई के बाद वह हाटा स्थित अपने जीजा के घर चले गए। वहां से उन्हें गोरखपुर जाना था, जहां से ट्रेन पकड़नी थी। रास्ते में कुसुम्ही जंगल पड़ता है, इसलिए वह बुढ़िया माई मंदिर में दर्शन के लिए रुक गए। दर्शन के बाद मंदिर के पास एक पेड़ पर गमछा बांधकर फंदा बनाया और इसके बाद एक वीडियो शूट किया। प्रद्युम्न ने वीडियो को व्हाट्सऐप स्टेटस पर लगाया और फिर आत्महत्या कर ली। काफी देर बाद किसी गांववाले ने फंदे से लटका शव देखा और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने आईडी और मोबाइल के आधार पर पहचान कर परिजनों को सूचना दी।
Source link
इंजीनियर ने लिखा- बाय-बाय अलविदा:गोरखपुर के जंगल में फंदा लगाकर जान दी, सुसाइड के लिए उकसाने वाली पत्नी गिरफ्तार














Leave a Reply