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विदिशा मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती और वेतन भुगतान में कथित भ्रष्टाचार तथा फर्जीवाड़े के मामले में शुक्रवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे गंभीर मानते हुए मध्य प्रदेश शासन के अधिकारियों को नोटिस
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एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा NHRC को भेजी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विदिशा मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्स कर्मचारियों के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हो रहा है। शिकायत के अनुसार, जहां वास्तविक रूप से लगभग 400 कर्मचारी कार्यरत हैं, वहीं लगभग 600 कर्मचारियों के नाम पर वेतन बिल तैयार किए जा रहे हैं।
आरोप- हर महीने लाखों का भुगतान हो रहा आरोप है कि फर्जी कर्मचारियों के नाम पर हर महीने लाखों रुपए का भुगतान निकाला जा रहा है। शिकायत में मेडिकल कॉलेज के डीन, निजी आउटसोर्स कंपनी और कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत का भी दावा किया गया है।
मामले में कर्मचारियों के पीएफ रिकॉर्ड में गड़बड़ी, श्रम कानूनों के उल्लंघन और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्तियों जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं। शिकायत में यह भी बताया गया है कि एक नर्स ने वर्ष 2021 से 2024 तक कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी की। मामला सामने आने के बाद कार्रवाई के बजाय समझौते का प्रयास किया गया।
रिपोर्ट मिलने पर होगी आगे की कार्रवाई NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा है कि शिकायत प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितताओं और मानवाधिकार हनन की ओर इशारा करती है।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी। NHRC के हस्तक्षेप के बाद मेडिकल कॉलेज में कथित भ्रष्टाचार का यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।















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