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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर आज पूरी दुनिया दो धड़ों में बंटी नजर आती है। एक वो जो इसे भविष्य मानते हैं और दूसरे वो जो इससे आशंकित हैं। एक्सपर्टस का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बड़ते उपयोग से इंदौर सहित मप्र की कई कंपनियों में रोजगार का संकट पैदा हो गया है। वहीं देश की दिग्गज आईटी कंपनी इंफोबिंस के को-फाउंडर अविनाश सेठी का मानना है कि भारत इस समय एक ऐसी तकनीकी क्रांति के मुहाने पर खड़ा है, जो अगले कुछ सालों में देश में यूनिकॉर्न्स (ऐसे स्टार्टअप जिनकी वैल्यूएशन1 बिलियन डॉलर की होती है, उन्हें यूनिकॉनर्स कहा जाता है) की बाढ़ लाने के साथ ही गुगल और एप्पल जैसे ग्लोबल इनोवेशन देगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर अविनाश सेठी ने क्या कुछ कहा पढ़िए… सवाल : हर जगह AI की चर्चा है। क्या आपको लगता है कि यह सामान्य आदमी की जिंदगी में वाकई कोई बड़ा बदलाव ला रहा है? अविनाश सेठी : एआई अब भविष्य की बात नहीं रह गई है, यह हमारे वर्तमान का हिस्सा बन चुका है। हम इसे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में पहले ही गहराई से इस्तेमाल कर रहे हैं। आप गूगल मैप्स इस्तेमाल करते हैं, वह एआई इनेबल्ड है। गूगल सर्च में अब एआई मोड आ गया है। यहां तक कि व्हाट्सएप पर मेटा एआई आपके मैसेज लिखने और जानकारी खोजने में मदद कर रहा है। यह एक ऐसी ताकतवर तकनीक है जो वक्त के साथ खुद सीखती है। यह यूजर की जरूरतों, उसकी पसंद और उसके पुराने फैसलों को समझकर उसे ‘हाइली कस्टमाइज्ड’ अनुभव देती है। यह आपकी लाइफ आसान बनाने के लिए किया गया सबसे शानदार नवाचार है। सवाल : सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में इसका उपयोग किया जा रहा हैं। क्या इससे काम करने के तरीके में बदलाव आया है? अविनाश सेठी : बिल्कुल! सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में एआई की मदद से काम करना शुरू कर दिया गया है और नतीजे चौंकाने वाले हैं। डेवलपमेंट एफर्ट अब आधा रह गया है। बाकी का आधा काम एआई न केवल जल्दी, बल्कि पहले से कहीं बेहतर तरीके से कर रहा है। इससे डेवलपर की उत्पादकता बढ़ी है और हम कम समय में वर्ल्ड-क्लास प्रोडक्ट्स तैयार कर पा रहे हैं। डेवलपर को नए इनोवेशन करने के लिए अब समय मिल रहा है। वह नया करने के बारे में सोच पा रहा है। सवाल : एक बड़ा डर यह है कि एआई आने से नौकरियां चली जाएंगी और बिजनेस कम हो जाएगा? एआई आने से उन लोगों के लिए भी तकनीक सुलभ हो जाएगी जिनके लिए यह पहले बहुत महंगी या कठिन थी। आज के प्रतिस्पर्धी माहौल में कोई भी बिजनेस बिना डेटा और तकनीक के ग्रो नहीं कर सकता। आपको डेटा हिस्ट्री चाहिए कि आपका बिजनेस कहां और कब बढ़ रहा है। इसलिए हर बिजनेस को सॉफ्टवेयर ड्रिवन होना ही पड़ेगा। सवाल : भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम और युवाओं के लिए आप इसमें क्या संभावनाएं देखते हैं? अविनाश सेठी : भारत के लिए यह एक ‘गोल्डन एरा’ है। हमने देखा कि कैसे 5-7 साल पहले ‘जियो’ ने इंटरनेट का लोकतंत्रीकरण किया और हर हाथ में मोबाइल पहुंचा दिया। एआई भी वही करने वाला है। मेरा मानना है कि पिछले 5 साल में जो हमने 100-200 यूनिकॉर्न देखे हैं, अगले 4-5 साल में यह संख्या आसानी से 2000 तक पहुंच जाएगी। आज छोटे शहर के बच्चे के पास भले ही बहुत संसाधन न हों, लेकिन अगर उसके पास एआई टूल्स हैं, तो वह अकेले ही कोडिंग, मार्केटिंग कंटेंट और बिजनेस ऑटोमेशन कर सकता है। उसे शुरुआत में किसी बड़ी टीम की जरूरत नहीं है। सवाल : क्या भारत की सर्विस इकोनॉमी के लिए एआई खतरा है? अविनाश सेठी : नहीं, यह एक पावरफुल अपॉर्चुनिटी है। भारत एक सर्विस बेस्ड कंट्री है। चाहे वो आईटी हो या बीपीओ। एआई हमारी एफिशिएंसी को कई गुना बढ़ा देगा। हम कम समय में दुनिया को ज्यादा और बेहतर सर्विस दे पाएंगे। नौकरियां खत्म नहीं होंगी, बस नौकरियों का स्वरूप बदल जाएगा। काम करने का तरीका बदल जाएगा। आप देखेंगे की एआई से आने वाले 5 से 10 सालों में भारत से ऐसे इनोवेशन निकलकर आएंगे जो ग्लोबली बड़ा नाम बनेंगे। आने वाले समय में भारत से एप्पल और गुगल जैसे बड़े इनोवेशन होंगे।
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इंफोबिंस के को-फाउंडर बोले- AI नौकरी नहीं छीन सकता:बल्कि हर हाथ को सुपरपावर देगा; आने वाले सालों में भारत बड़े ग्लोबल इनोवेशन करेगा















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