छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार के बाघमारा में देश की चौथी गोल्ड माइंस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील की है कि वे एक साल तक सोना न खरीदें। इसका उद्देश्य मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण देश की अर्थव्यवस्था, विदेशी मुद्रा भंडार और रुपए को कमजोर होने से बचाना है। भारत में सोने का भंडार कम है और देश लगभ
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दरअसल, छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार के बाघमारा में देश की चौथी गोल्ड माइंस से अगले 2 साल में सोना खनन शुरू हो जाएगा। जीएसआई सर्वे रिपोर्ट के बाद वेदांता ग्रुप ने यहां डीप ड्रिलिंग (एक्सप्लोरेशन) का काम शुरू कर दिया है। 500 मीटर तक ड्रिलिंग की जा रही है।
ऐसे 50 ड्रिलिंग होल्स से सैंपल लेकर लैब भेज रहे हैं, ताकि सोने की गुणवत्ता, कितने क्षेत्रफल में और कितनी गहराई में सोने का भंडार फैला हुआ है, इसका सटीक डेटाबेस तैयार किया जा सके। शुरुआती रिपोर्ट में यहां 2700 किलो सोने की पुष्टि हुई है। यह माइंस देश के लिए बड़ी उम्मीद है, क्योंकि भारत में सिर्फ गिनती की 3 एक्टिव माइंस ही हैं।



ड्रिलिंग के दौरान पत्थरों में दिखे सोने के कण
भास्कर टीम 15 मई को रायपुर से पिथौरा से होते हुए कच्चे रास्तों से बाघमारा गोल्ड माइनिंग साइट्स पर पहुंची। यहां पर पहाड़ के नजदीक घने जंगल के बीचोंबीच एक्सप्लोरेशन का काम जारी है। ड्रिलिंग के दौरान सिलेंडरिंग शेप में निकले पत्थर में सोने के कण अलग ही चमक के साथ दिखाई देते हैं। यहां 603 हेक्टेयर साइट में सोना है।
गौरतलब है कि अंग्रेजों के शासन काल से यहां पर सोने की खबरें समय-समय पर सामने आती रहीं, लेकिन अब इसकी आधिकारिक पुष्टि और एक्सप्लोरेशन शुरू हो चुका है।
10 साल लेट हो गया प्रोजेक्ट
वेदांता को लेटर टु इनटेंस 2015 में जारी हो चुका है। मगर, पहले फॉरेस्ट क्लियरेंस और फिर एनजीटी में दायर याचिका के चलते ये मामला 10 साल खिंच गया। हालांकि सबकुछ क्लियर है। इस खदान से 2700 किलो सोना निकलेगा, इससे सरकार को 81.4 करोड़ रुपए की आय होगी।
भारत में सालाना 800 टन सोने की खपत
भारत में सालाना 700-800 टन सोने की खपत है, लेकिन बमुश्किल से देश में मौजूदा गोल्ड माइंस से 1 से 1.5 टन सोना ही निकलता है। 90 प्रतिशत से अधिक सोना भारत आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा डॉलर में भुगतान होता है। आज एक डॉलर की कीमत 95 रुपए है। भारत में सर्वाधिक सोना शादी-विवाह के उद्देश्य से खरीदा जाता है। चीन के बाद भारत में सर्वाधिक सोना खरीदा जाता है।
भास्कर एक्सपर्ट
साउथ वेस्ट पिनाक्ल के ड्रिलिंग सुपरवाइजर अभिमन्यु मंडल ने कहा, बिल्कुल, यहां काफी सोने का भंडार है। मगर, माइनिंग से पहले पूरी कैलकुलेशन के लिए डेटाबेस जरूरी है। इसे जुटाया जा रहा है। ड्रिलिंग का लगभग आधा काम हो चुका है। आप देख सकते हैं, जो मिट्टी निकल रही है उसमें बारीक-महीन सोने के चमकदार कण दिख रहे हैं। हमें इस पूरे क्षेत्र में 50 से ज्यादा ड्रिलिंग होल्स करने हैं।
एक्सप्लोरेशन के लिए वेदांता को टेंडर अलॉट हुआ है। उनकी रिपोर्ट के बाद माइनिंग की परमिशन दी जाएगी। सोने का भंडार निश्चित तौर पर अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। शासन प्रोजेक्ट पर गंभीरता से काम कर रहा है।
रजत बंसल, संचालक, भौमिक एवं खनिज कर्म संचालनालय, छत्तीसगढ़
प्रमुख गोल्ड माइंस, जहां धरती उगलती है सोना
हट्टी गोल्ड माइंस, कर्नाटक: यह भारत की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी सोने की खान है। इसका इतिहास करीब 2,000 साल पुराना है। यहां से हर साल करीब 1.8 टन सोना निकाला जाता है।
कोलार गोल्ड फील्ड्स, कर्नाटक: ब्रिटिश काल में 1880 में यहां सोने की खुदाई शुरू हुई। 2001 तक 800 टन सोना निकाला जा चुका है। फिलहाल बंद है। इसे फिर शुरू करने की योजना बन रही है।
माइनिंग शुरू नहीं हुई : सोनभद्र (उत्तरप्रदेश), रामगिरी गोल्ड फील्ड (आंध्रप्रदेश), चिगरगुंटा-बिसनाथम (आंध्रप्रदेश)। यहां एक्सप्लोरेशन जारी- बाघमारा, बलौदाबाजार (छत्तीसगढ़)।















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