साइबर फ्रॉड के स्लीपर सेल नेटवर्क के 3 आरोपी गिरफ्तार:तारबाहर पुलिस ने म्यूल अकाउंट सिंडिकेट पर की कार्रवाई, 60 शिकायतें दर्ज




बिलासपुर में साइबर अपराध के ‘म्यूल अकाउंट’ सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। तारबाहर पुलिस ने अंबिकापुर से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से तीन मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खातों के खिलाफ विभिन्न राज्यों में 60 से अधिक साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस अब आरोपियों और उनसे जुड़े अन्य व्यक्तियों के बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और नेटवर्क की जांच कर रही है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नयापारा अंबिकापुर निवासी नवनीत मिश्रा उर्फ विक्की पंडित (19 वर्ष), कंपनी बाजार अंबिकापुर निवासी ऋषभ साहू (24 वर्ष) और ग्राम डिगमा, नेहरू नगर, सरगुजा निवासी राजा घरानी (22 वर्ष) के रूप में हुई है। इन सभी के खिलाफ धारा 318(4), 317(4), 3(5), 112 बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। यह कार्रवाई चार दिनों के भीतर दूसरी बड़ी सफलता है। इससे पहले, 13 मई को तारबाहर पुलिस ने म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने के आरोप में दीपेश कुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। दीपेश गुप्ता के मोबाइल फोन से मिले महत्वपूर्ण तकनीकी इनपुट और डिजिटल सबूतों के आधार पर जांच में विक्की पंडित, ऋषभ साहू और राजा घरानी की भूमिका सामने आई। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस टीम ने तीनों संदिग्धों को अंबिकापुर से हिरासत में लिया। पूछताछ और मोबाइल फोन की तकनीकी जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि दीपेश गुप्ता और गिरफ्तार तीनों आरोपी व्हाट्सएप और मोबाइल के जरिए विभिन्न व्यक्तियों के बैंक खातों की जानकारी साझा करते थे। वे इस तरह एक ‘म्यूल अकाउंट’ नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। जांच में साइबर फ्रॉड की पुष्टि जांच में साइबर फ्रॉड की पुष्टि हुई है। शुरुआती तकनीकी जांच में पता चला है कि जिन बैंक खातों का इस्तेमाल आरोपियों ने किया था, उनके खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों में 60 से ज्यादा साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हैं। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम लेने, उसे आगे ट्रांसफर करने और निकालने के लिए किया जा रहा था। कमीशन के नाम पर साइबर ठगी जांच में यह सामने आया है कि ऐसे “म्यूल अकाउंट” सिंडिकेट साइबर अपराधियों के लिए स्लीपर सेल नेटवर्क की तरह काम करते हैं। ये लोग आम लोगों के बैंक खाते कमीशन देकर हासिल करते हैं और उन्हें संगठित साइबर ठगी करने वाले गिरोहों को दे देते हैं। इन खातों के जरिए करोड़ों रुपए की ठगी की रकम देशभर में तेजी से भेजी और छिपाई जाती है। इससे असली साइबर अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है और जांच भी प्रभावित होती है।



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