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- In Chhattisgarh, Only Four Of The 29 Ethanol Plants Have Been Operational In Six Years, Producing 330 Million Liters Instead Of 100.
रायपुर31 मिनट पहलेलेखक: प्रशांत गुप्ता
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मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण भारत में ईंधन संकट जैसे हालात बन रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करने, कार-बाइक शेयरिंग अपनाने और बेहद जरूरी होने पर ही यात्रा करने की अपील की है, ताकि फ्यूल की खपत कम हो सके। ऐसे दौर में एथेनॉल को पेट्रोल के बड़े विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
दुनिया में इसका सबसे सफल उदाहरण ब्राजील है। 1970 के दशक में तेल संकट के बाद ब्राजील ने पेट्रोल में 27% एथेनॉल मिलाना शुरू किया और बाद में ऐसी गाड़ियां भी विकसित कीं, जो 100% एथेनॉल पर चल सकें।
अब भारत भी इसी मॉडल पर आगे बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने 2020 में इसी उद्देश्य से 29 कंपनियों के साथ एमओयू किए थे। योजना थी कि 5,000 करोड़ रुपए के निवेश से राज्य में सालाना 100 करोड़ लीटर एथेनॉल उत्पादन क्षमता विकसित की जाए। लेकिन छह साल बाद भी यह योजना जमीन पर पूरी तरह नहीं उतर सकी।
भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि 29 में से केवल 6 कंपनियों ने उत्पादन शुरू किया। इनमें से भी 2 प्लांट कच्चा माल महंगा होने के कारण बंद हो चुके हैं। फिलहाल सिर्फ 4 प्लांट संचालित हैं, जिनसे सालाना करीब 33 करोड़ लीटर एथेनॉल उत्पादन हो रहा है।
यह प्रदेश की जरूरत की जरूरत तो पूरी कर रही रहे हैं, 7 करोड़ लीटर देश के दूसरे राज्यों को पहुंचा रहे हैं। अगर सभी प्रस्तावित प्लांट शुरू हो जाते तो छत्तीसगढ़ देश को हर साल 100 करोड़ लीटर एथेनॉल उपलब्ध करा सकता था। यानी क्षमता का एक तिहाई ही बना रहे हैं। हमारी क्षमता में 65 करोड़ लीटर और उत्पादन की गुंजाइश है।
राज्य में रोजाना 36.35 लाख लीटर पेट्रोल की खपत अनुबंध के तहत अगर 29 कंपनियां अपनी पूरी क्षमता से एथेनॉल बनाती हैं तो सालाना 100 करोड़ लीटर एथेनॉल बन सकता था। राज्य में आज 3,635 किलोलीटर प्रतिदिन की (36,35,000 लीटर) पेट्रोल की खपत है। पेट्रोलियम कंपनियां फर्मों से एथेनॉल खरीदकर प्रति लीटर 20 प्रतिशत एथेनॉल का मिलाती हैं।
यहां लगने हैं एथेनॉल प्लांट
बेमेतरा 9 {रायपुर 3 {दुर्ग 3 {मुंगेली 2 {जगदलपुर 1 {जांजगीर-चांपा 1 {कवर्धा 1 {महासमुंद 1 {रायगढ़ 1 {सरगुजा 1 {बिलासपुर 1
एथेनॉल उत्पादन करने वाले प्लांट- हयाती ब्रेवरेज प्रा. लि. बेमेतरा। बजरंग केमिकल डिस्टलरी एलएलपी रायपुर, आरंग में। मोदी बायोटेक प्रा. लि. नईदिल्ली प्लांट रायपुर में। एनकेजे बायोफ्यूल प्रा. लि., भिलाई प्लांट कवर्धा में। अभी बंद है।
1 लीटर पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण, इसके क्या फायदे समझिए…

इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार के टैक्स जुड़ते हैं। इससे रायपुर में पेट्रोल के दाम 103.56 रु. पहुंच गया है। यानी की पेट्रोल की असली लागत 55-60 रुपए ही है, लेकिन बाकी हिस्सा टैक्स और सरकारी राजस्व का है।
20% एथेनॉल मिलाने पर ये होगा गणित 1 लीटर पेट्रोल में 20% एथेनॉल (E20) मिलाया जाता है, क्योंकि एथेनॉल आमतौर पर पेट्रोल से सस्ता पड़ता है और इसका बड़ा हिस्सा देश में ही गन्ना, मक्का, खराब अनाज से बनता है। इसलिए सरकार के लिए फायदा केवल प्रति लीटर कीमत में नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा बचत में भी होता है।
0.8 लीटर पेट्रोल- 48 रुपए
0.2 लीटर एथेनॉल- 11.6 (प्रति लीटर 58 रुपए)
कुल लागत- 59.6 रुपए।
कच्चा तेल जो खाड़ी देशों से आयात करना पड़ता है, उससे निर्भरता घटती है। 20% ब्लेंडिंग से विदेशी मुद्रा बचती है, यानी भुगतान डॉलर नहीं रुपए में करना पड़ता है। इस पर एक्साइज ड्यूटी, वैट नहीं बल्कि सिर्फ 5 प्रतिशत जीएसटी लगता है। सरकार इसे ग्रीन फ्यूल के रूप में पेश करती है।
एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना ही पेट्रोल का सबसे मजबूत विकल्प है। छत्तीसगढ़ में 5 प्लांट से एथेनॉल बन रहे हैं। आने वाले दिनों में और प्लांट शुरू होंगे। एथेनॉल की खरीदी भारत से ही करनी है, डॉलर नहीं रुपए में होगी। -अखिल धगट, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ पेट्रोल-डीजल एसोसिएशन













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