बगला घाट पर प्रतिबंध के बावजूद लोग कर रहे स्नान:प्रशासन ने इसे खतरनाक घोषित किया, होमगार्ड या गोताखोर तैनात नहीं




विदिशा में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचने और अधिक मास के चलते लोग गर्मी से राहत पाने के लिए नदी घाटों का रुख कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा खतरनाक घोषित और प्रतिबंधित किए गए बगला घाट पर भी लोग चेतावनी बोर्ड को नजरअंदाज कर स्नान करने पहुंच रहे हैं। सुबह के समय यहां बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की भीड़ रहती है, जबकि मौके पर लोगों को रोकने या किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए कोई सुरक्षा व्यवस्था मौजूद नहीं है। बगला घाट पर नदी की गहराई अधिक है और पानी का बहाव भी तेज रहता है। पूर्व में यहां डूबने से कई लोगों की जान जा चुकी है। इन जानलेवा हादसों को देखते हुए ही प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से इस घाट पर नहाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। घाट पर स्थित मंदिर के पुजारी ने बताया कि वर्तमान में नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे यहां स्नान करने का जोखिम और अधिक हो गया है। स्विमिंग पूल की कमी, बच्चों को तैरना सिखा रहे परिजन
शहर में स्विमिंग पूल जैसी सुविधाओं का अभाव है, जिसके कारण लोग नदी का ही सहारा ले रहे हैं। मंदिर के पुजारी के अनुसार, अधिक मास के धार्मिक महत्व और भीषण गर्मी की वजह से श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा हुआ है। कई माता-पिता अपने बच्चों को तैरना सिखाने के लिए भी इसी खतरनाक घाट पर ला रहे हैं। पुजारी ने प्रशासन से घाट पर गोताखोर और सुरक्षा बल तैनात करने की अपील की है। स्थानीय लोगों ने की होमगार्ड तैनाती की मांग
घाट पर प्रतिदिन सुबह घूमने और दर्शन करने आने वाली स्थानीय निवासी अश्वनी राजपूत ने बताया कि यहां बड़ी संख्या में लोग स्नान कर रहे हैं, लेकिन उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। घाट पर सुरक्षा के इंतजाम शून्य हैं। उन्होंने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए तुरंत होमगार्ड जवानों की तैनाती की मांग की है। सख्ती और निगरानी की जरूरत
स्थानीय लोगों का कहना है कि घाट पर सिर्फ चेतावनी बोर्ड लगा देने से काम नहीं चलेगा, क्योंकि लोग इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि घाट पर निगरानी बढ़ाई जाए और प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराया जाए, ताकि किसी बड़े हादसे को टाला जा सके।



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