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संभल के विवादित हरिहर मंदिर बनाम शाही जामा मस्जिद परिसर की मरम्मत को लेकर श्रीकल्कि सेना ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को आपत्ति भेजी है। सेना के संयोजक और अधिवक्ता सुभाष त्यागी ने एक ‘फर्जी इंतजामिया कमेटी’ द्वारा मरम्मत की अनुमति मांगने पर सवाल उठाए हैं। अधिवक्ता त्यागी ने बताया कि कुछ लोगों ने बिना अधिकार के एक ‘फर्जी इंतजामिया कमेटी’ का गठन किया है। इस कमेटी ने खुद को ढांचे का सदर बताते हुए ASI से इसके पूर्वी मुख्य द्वार की मरम्मत की अनुमति मांगी है। कमेटी का दावा है कि यह द्वार जर्जर हो चुका है और कभी भी गिर सकता है। त्यागी ने मेरठ स्थित ASI के अधीक्षण पुरातत्वविद को ईमेल के जरिए अपनी आपत्ति भेजी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परिसर ASI की संरक्षित संपत्ति है। कानूनन, इसमें किसी भी प्रकार के निर्माण या मरम्मत का अधिकार केवल ASI के पास है। कोई भी व्यक्ति या संस्था इसमें एक भी ईंट लगाने या हटाने का अधिकार नहीं रखती। सुभाष त्यागी ने ASI से ऐसी किसी भी अनुमति को जारी न करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हो, तो ASI को स्वयं सर्वेक्षण करके नियमावली के अनुसार इस विवादित परिसर का उचित रखरखाव और मरम्मत कार्य कराना चाहिए। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस परिसर को ‘विवादित ढांचा’ कहने का निर्देश दिया है। बीती 24 नवंबर 2024 को कोर्ट के आदेश पर हुए सर्वे के दौरान हिंसा भड़की थी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद से यह पूरा मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
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कल्कि सेना ने जामा मस्जिद की मरम्मत पर आपत्ति जताई:इंतजामिया कमेटी द्वारा अनुमति मांगने को बताया कानूनन गलत, ASI को भेजा लेटर















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