बोकारो में ट्रेजरी के बाद एचआरए घोटाला, गांव में पोस्टिंग फिर भी लेते शहर का भत्ता



भास्कर एक्सक्लू​िसव बोकारो में ट्रेजरी घोटाले के बाद अब सामा​िजक सुरक्षा विभाग में आवास भत्ता (एचआरए) घोटाला प्रकाश में आया है। बोकारो जिला के सामाजिक सुरक्षा विभाग के कर्मी नगर निगम के बाहर रहने के बाद भी 20 प्रतिशत एचआरए लिया है। जबकि नगर निगम क्षेत्र के बाहर रहने के बाद भी सामाजिक सुरक्षा के लगभग एक दर्जन कर्मियों ने अपने मूल वेतन का 20 प्रतिशत एचआरए लिया है। मजेदार बात यह है कि संबंधित डीडीओ और ट्रेजरी ने भी वेतन ​के उस बिल को पास किया है। बता दें कि एचआरए के लिए झारखंड को तीन श्रेणी में बांटा गया है। इसमें एक्स श्रेणी में रांची को रखा गया है, जहां मूल वेतन का 30 प्रतिशत, वाई श्रेणी में बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर आदि में 20 प्रतिशत और जेड श्रेणी में राज्य के अन्य छोटे कस्बे और ग्रामीण क्षेत्र का 5 प्रतिशत एचआरए मूल वेतन के आधार पर मिलता है। बीडीओ और सीओ से अधिक एचआरए लेते हैं लेखा लिपिक जिले के विभिन्न प्रखंड अनुमंडल में कार्यरत सामाजिक सुरक्षा के लिपिकों को वहां पदस्थापित बीडीओ-सीओ से अधिक एचआरए मिल रहा है। सामाजिक सुरक्षा के लेखा लिपिकों को सिर्फ सामाजिक सुरक्षा के कार्य में ही लगाया जाना है, वरना दूसरे जगह प्रतिनियुक्ति की स्थिति में उनका वेतन का भुगतान नहीं होगा। लेकिन जिले में कई विभागों में उनकी प्रतिनियुक्ति की जा रही है। डीडीओ की जिम्मेदारी : टीओ प्रतिनियुक्ति के कारण शहर का मिल रहा है भत्ता अब तक 2.50 करोड़ की अतिरिक्त निकासी का आरोप बोकारो में सामाजिक सुरक्षा विभाग के कर्मी प्रखंड में पदस्थापित रहने के बाद भी 20 प्रतिशत एचआरए ले रहे हैं। आश्चर्यजनक पहलू यह है कि यह हाल की बात नहीं है, बल्कि वर्षों से यह खेल जारी है। जब इस संबंध में छानबीन की गई तो जानकारी मिली कि जिला मुख्यालय व चास प्रखंड में कुल 8 कर्मी पदस्थापित है। वहीं लगभग 7 कर्मी अन्य प्रखंड में पदस्थापित हैं। इसमें कई कर्मी प्रखंड से जिला मुख्यालय आए हैं। वहीं कई कर्मी जिला मुख्यालय से प्रखंडों में पदस्थापित हुए हैं। यह सभी 20 प्रतिशत एचआरए ले रहें हैं। वहीं उक्त कर्मी परिवहन भत्ता भी ले रहे हैं। सामाजिक सुरक्षा के लेखा लिपिक इस संबंध में तर्क दे रहे हैं कि उनकी पदस्थापना प्रखंड में नहीं है, इसलिए उन्हें 20 प्रतिशत एचआरए और यात्रा भत्ता मिल रहा है। अगर सात कर्मी ही औसतन तीन हजार रुपए प्रतिमाह अधिक भुगतान ले रहे हैं तो राशि प्रतिवर्ष दो लाख 52 हजार रुपए अतिरिक्त निकासी कर रहे हैं। इस प्रकार की निकासी वित्तीय वर्ष 2017-18 से ही हो रही है।



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