6 लाख में परीक्षा पास कराने की डील, सेंटर हेड समेत 4 गिरफ्तार




टाटीसिलवे थाना क्षेत्र के डोल बगीचा स्थित जीनियस इंस्टिच्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी के ऑनलाइन परीक्षा केंद्र पर एसएससी जीडी कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा दे रहे एक अभ्यर्थी समेत 4 आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इनमें सेंटर हेड विकास कुमार, इन्वीजिलेटर संजीत कुमार, आईटी हेड मुन्ना राज आैर अभ्यर्थी मृत्युंजय कुमार यादव शामिल हैं। परीक्षा के दौरान अभ्यर्थी ने कंप्यूटर को रि-स्टार्ट किया, जिसके बाद वहां मौजूद अन्य स्टाफ को संदेह हुआ। इस काम में इन्वीजिलेटर संजीत कुमार भी अभ्यर्थी की मदद कर रहे थे। अभ्यर्थी की संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने के बाद जब मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि प्रश्नपत्र रिमोट एक्सेस के माध्यम से बाहर में बैठा सॉल्वर गैंग का सदस्य हल कर रहा है। इसके बाद पुलिस ने कंप्यूटर को जब्त कर लिया। अभ्यर्थी व इन्वीजिलेटर को थाने में लाकर पूछताछ की गई तो पूरे मामले का भंडाफोड़ हुआ। दोनों ने स्वीकार किया कि परीक्षा पास कराने के लिए सेंटर हेड विकास कुमार से 6 लाख में डील फाइनल हुई है। उन्होंने पुलिस को कई और अहम जानकारी दी। जिसके आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। एडीक्विटी ने टेंडर लिया, काम वेंडर को दिया पुलिस की जांच में अहम खुलासे हुए हैं। एसएससी जीडी कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा का टेंडर एडीक्विटी कैरियर टेक्नॉलॉजी प्रा.लि. को दिया गया है। लेकिन कंपनी ने परीक्षा कराने का जिम्मा खुद उठाने के बजाए वेन्सिस्को नामक वेंडर को सौंप दिया। पिस्का मोड़ स्थित फ्यूचरिस्टिक ऑनलाइन परीक्षा केंद्र पर 9 मई को हुई परीक्षा कराने जिम्मा भी इसी वेन्सिस्को वेंडर को दिया गया था। वहां भी गड़बड़ी के बाद 6 अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया गया था। वेंडर को काम देने की सूचना देना जरूरी नैतिक आधार पर परीक्षा संचालित कराने का जिम्मा वेंडर को नहीं देना चाहिए। एजेंसी की जिम्मेवारी भी बनती है कि अगर वेंडर से परीक्षा संचालित कराता है तो डिपार्टमेंट (एसएससी) को सूचना दे। क्योंकि परीक्षा की प्रणाली में ट्रांसपेरेंसी रखना बहुत ही जरूरी है। संबंधित विभाग को भी शर्त व नियम कड़े रखने चाहिए, जिससे परीक्षा में चीटिंग होने की संभावनाएं जाने-अनजाने भी उत्पन्न न हो पाए। नालंदा से जुड़े हैं गिरोह के तार, ग्राउंड में पहुंचे अभ्यर्थी को करता है टारगेट हाईटेक नकल कराने वाले इस गिरोह के तार बिहार के नालंदा से जुड़े हुए हैं। सरगना ने ही सेंटर हेड विकास कुमार से डील की थी। सेंटर पर अन्य कई अभ्यर्थियों को भी इस गिरोह द्वारा परीक्षा में नकल कराने की आशंका है। फिलहाल पुलिस जांच कर रही है आैर टेक्निकल टीम की मदद से सरगना तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। पुलिस जांच में पता चला है कि गैंग में शामिल सदस्य ही अभ्यर्थियों को टारगेट करते हैं। अभ्यर्थी से ले रखा था चेक, मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र भी कराया था जमा सेंटर हेड विकास कुमार ने नकल कराने के लिए ऑनलाइन परीक्षा केंद्र के सामने किराए पर एक घर ले रखा था। उसी घर में वह आईटी हेड मुन्ना राज की मदद से मास्टर कम्प्यूटर से एक अतिरिक्त कम्प्यूटर कनेक्ट कर रखा था। जिसके माध्यम से किराए के घर में बैठा गैंग प्रश्नपत्र हल कर रहा था। दो अभ्यर्थियों का मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र और 5 चेक भी सेंटर हेड विकास कुमार ने अपने पास जमा करा लिया था, ताकि परीक्षा पास कराने के बाद उनसे आसानी से पैसा ले सके। पुलिस ने मूल कागजात के अलावा चेक भी किराए के घर से बरामद किए हैं। सेंटर हेड उपलब्ध कराता है इंटरनेट कनेक्शन, आईटी हेड करता है सपोर्ट टाटीसिलवे के अलावा पिस्का मोड़ में भी एसएससी जीडी कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा के दौरान सेंटर हेड की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। दोनों ही जगह पर सेंटर हेड ने आईटी हेड की मदद से कम्प्यूटर को रिमोट एक्सेस पर दिया है। सेंटर हेड ने ही इसके लिए इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध कराया था, जिसके बाद मास्टर कम्प्यूटर से अतिरिक्त कम्प्यूटर को जोड़ा गया, जहां सॉल्वर प्रश्नों को हल करने वाले थे।- मुकेश चौधरी, साइबर सिक्योरिटी



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