LU में लागू होगा स्टेप मार्किंग की व्यवस्था:इवैल्यूएशन में फैक्ट्स और पॉइंट्स पर भी मिलेंगे नंबर, कुलपति ने की अहम बैठक




लखनऊ विश्वविद्यालय उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में अंक देने की विसंगतियों से बचने के लिए स्टेप मार्किंग व्यवस्था लागू करने जा रहा है। विश्वविद्यालय के सेकेंड कैंपस में सभी विषयों के मूल्यांकन प्रभारियों के साथ बैठक में कुलपति प्रो.जेपी सैनी ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। कुलपति ने कहा कि अक्सर यह देखा जाता रहा है कि विश्वविद्यालय स्तर पर उत्तर पुस्तिकाओं की अधिक संख्या होने के कारण मूल्यांकन में एकरूपता की कमी रह जाती है। एक ही प्रश्नपत्र को कई अलग-अलग परीक्षक जांचते हैं और सबका नम्बर देने का तरीका भी अलग होता है। जिससे छात्रों के अंकों में विसंगतियां आने की आशंका बनी रहती थी। इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए मूल्यांकन व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन किए गए हैं। इनकी होगी तैनाती नई व्यवस्था सभी विषयों और पाठ्यक्रमों में लागू की जाएगी। स्टेप मार्किंग में सब्जेक्टिव प्रश्नपत्रों के उत्तरों को विभिन्न मुख्य बिंदुओं और चरणों में विभाजित कर जांचा जाएगा। यदि किसी छात्र का अंतिम उत्तर किसी कारणवश त्रुटिपूर्ण भी होता है, परंतु उसके द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया और शुरुआती चरण सही हैं, तो उसे प्रत्येक सही चरण के लिए निर्धारित अंक प्रदान किए जाएंगे। मूल्यांकन में एकरूपता बनाए रखने के लिए पहली बार हेड एक्जामिनर और डिप्टी हेड की नियुक्ति की जाएगी। मूल्यांकन प्रक्रिया के दिशा-निर्देश मूल्यांकन कार्य प्रारंभ होने से पूर्व सभी हेड एक्जामिनर्स प्रत्येक प्रश्नपत्र सब्जेक्टिव का एक प्रामाणिक सॉल्यूशन तैयार करना अनिवार्य होगा। जिसमें प्रश्नपत्र में पूछे गए प्रश्नों के “की वर्ड” निर्धारित किए जाएंगे। कॉपियों की सुचारू जांच सुनिश्चित करने के लिए हेड एक्जामिनर प्रत्येक जांचे गए बंडल में से अनिवार्य रूप से कुल उत्तर पुस्तिकाओं के न्यूनतम 5% उत्तर पुस्तिकाओं (कॉपियों) की स्वयं रैंडम दोबारा गहनता से जांच करेंगे। यदि उसके बाद भी छात्र अंकों से संतुष्ट नहीं है तो वो RTI अधिनियम के तहत कॉपी देख सकता है। संतुष्ट न होने पर चेलेंज मूल्यांकन का सहारा ले सकता है।



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