इंदौर प्रशासन की डिजिटल पहल:सोमवार की टीएल बैठक होगी वर्चुअल; अनावश्यक आवागमन रोकने को लेकर प्रशासन का फैसला




इंदौर जिला प्रशासन ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक अभिनव पहल शुरू की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के पालन में अब इंदौर में प्रति सोमवार आयोजित होने वाली समय-सीमा पत्रों के निराकरण संबंधी टीएल बैठक वर्चुअल माध्यम से आयोजित की जाएगी। सोमवार को पहली बार यह बैठक ऑनलाइन माध्यम से संपन्न हुई। कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में कलेक्टर कार्यालय परिसर में स्थित विभागों को छोड़कर अन्य सभी विभागों के अधिकारी वर्चुअली शामिल हुए। बैठक में इंदौर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. परीक्षित झाड़े, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सिद्धार्थ जैन, अपर कलेक्टर नवजीवन विजय पवार, रोशन राय और रिंकेश वैश्य सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। समय और संसाधनों की बचत पर जोर कलेक्टर ने बताया कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों को अधिक सुगम, प्रभावी और समयबद्ध बनाना है। साथ ही अनावश्यक आवागमन कम कर समय और संसाधनों की बचत सुनिश्चित करना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि अनावश्यक आवाजाही कम हो, लेकिन प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों। अब केवल अति आवश्यक मामलों में ही अधिकारियों को भौतिक रूप से बुलाया जाएगा। कई महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा हुई बैठक में जल गंगा संवर्धन अभियान, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, मिलावटखोरी विरोधी अभियान, फायर सेफ्टी और अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की समीक्षा की गई। जिन विभागों की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गई, उन्हें कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पहुंचना चाहिए। साथ ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के प्रकरणों का गुणवत्तापूर्ण निराकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। राजस्व मामलों में देरी पर सख्ती बैठक में नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे राजस्व प्रकरणों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि समय-सीमा में प्रकरणों का निराकरण नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि सीमांकन के कुछ मामलों में देरी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों पर पेनल्टी लगाई गई है और यह राशि प्रभावित आवेदकों को दी जाएगी।



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