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मध्य प्रदेश की वायरल गर्ल ने खुद को बालिग साबित करने के लिए हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में याचिका लगाई है। याचिका में दावा किया गया है कि उनके विवाह को अपराध की श्रेणी में डालने के लिए सरकारी जन्म प्रमाण पत्र में फर्जी तरीके से बदलाव कर उसे नाबालिग दिखाने की कोशिश की गई। उन्होंने कोर्ट से अपना मूल जन्म प्रमाण पत्र बहाल करने और सरकारी रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। याचिका के अनुसार, केरल में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान उनकी मुलाकात फरमान नामक युवक से हुई थी। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और मार्च 2026 में उन्होंने विवाह कर लिया था। खरगोन जिले की रहने वाली वायरल गर्ल पिछले साल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों के कारण चर्चा में आई थीं। मामला तब विवादों में आया, जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने इस विवाह पर आपत्ति जताई। आयोग का दावा था कि शादी के समय वायरल गर्ल की उम्र महज 16 वर्ष थी और विवाह के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद खरगोन पुलिस ने फरमान के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया। हालांकि, 20 अप्रैल 2026 को केरल हाईकोर्ट ने फरमान की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। फरमान के साथ संयुक्त याचिका लगाई अब इस मामले की कानूनी लड़ाई मध्यप्रदेश हाई कोर्ट पहुंच गई है। वायरल गर्ल और फरमान द्वारा दायर संयुक्त याचिका में दावा किया गया है कि इस अंतरधार्मिक विवाह का विरोध करने के लिए उनके पिता ने जन्म रिकॉर्ड में हेरफेर कर उन्हें नाबालिग साबित करने की कोशिश की। मूल जन्म प्रमाण पत्र को बिना किसी नोटिस या कानूनी प्रक्रिया के सरकारी पोर्टल से हटा दिया गया और उसकी जगह गलत जन्मतिथि दर्ज कर दी गई। याचिका में यह भी कहा है कि उनके पिता और कुछ अन्य लोगों ने इंटरनेट मीडिया पर फरमान के खिलाफ भड़काऊ और द्वेषपूर्ण प्रचार किया। व्यक्तिगत विवाह को जानबूझकर ‘लव जिहाद’ जैसे संवेदनशील शब्दों से जोड़कर सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई, ताकि सामाजिक माहौल प्रभावित हो सके। अंतरधार्मिक विवाह, सरकारी दस्तावेजों में कथित हेरफेर और सोशल मीडिया पर बढ़ते विवाद के कारण मामला संवेदनशील बना हुआ है। इंदौर खंडपीठ में इस याचिका पर जल्द सुनवाई होने की संभावना है। वकील ने कहा-जन्म प्रमाण पत्र में फर्जी बदलाव करवाए वायरल गर्ल के वकील का कहना है कि उनके पिता ने विवाह का विरोध करने के लिए सरकारी रिकॉर्ड और जन्म प्रमाण पत्र में फर्जी बदलाव करवाए। मूल जन्म प्रमाण पत्र को सरकारी पोर्टल से हटाकर नया रिकॉर्ड तैयार किया गया, ताकि उन्हें कानूनन नाबालिग साबित किया जा सके। वकील के मुताबिक- शादी के समय वायरल गर्ल पूरी तरह बालिग थीं और दोनों ने अपनी मर्जी से केरल में विवाह किया था। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ही खरगोन में फरमान के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया गया, जिस पर केरल हाई कोर्ट पहले ही गिरफ्तारी पर रोक लगा चुका है। जानबूझकर सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश याचिका में कहा कि व्यक्तिगत और कानूनी विवाह को सोशल मीडिया पर जानबूझकर सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। मूल जन्म प्रमाण पत्र बहाल करने और बिना कानूनी प्रक्रिया के सरकारी पोर्टल से दस्तावेज हटाने वालों के खिलाफ स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।
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इंदौर हाईकोर्ट में वायरल गर्ल की याचिका:कहा- उसे नाबालिग दिखाने बदला बर्थ सर्टिफिकेट; सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश हो रही कोशिश















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