क्या वेयर हाउस में चल रही थी अवैध पटाखा फैक्ट्री?:गत्तों के नीचे संदिग्ध बोरियां मिलीं, ब्लास्ट वाले जैसे कंटेनर भी वेयर हाउस में थे




देवास पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में पांच मजदूरों की दर्दनाक मौत ने लाइसेंस प्रक्रिया और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद ब्लास्ट साइट से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित एक वेयर हाउस की गतिविधियां भी संदेह के घेरे में हैं। फिलहाल उसे सील कर दिया गया है। वहां ऐसी सामग्री मिली है, जिनका उपयोग पटाखा निर्माण में किया जा सकता है। अधिकारी दावा कर रहे हैं कि वहां केवल स्टॉक रखा था, लेकिन अंदर से सामने आई तस्वीरें और वीडियो उनके दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। सवाल यह है कि क्या वेयर हाउस में अवैध रूप से पटाखा फैक्ट्री संचालित हो रही थी? वहां मिली सामग्री हादसे वाली फैक्ट्री से सीधे तौर पर मेल खाती दिख रही है। इस रिपोर्ट में पढ़िए वेयर हाउस में कैसे संदिग्ध सुराग मिले…? हादसे वाली जगह से करीब दो किलोमीटर दूर गांव कलमा के पास आगरा-मुंबई हाईवे किनारे यह वेयर हाउस स्थित है। विस्फोट के बाद ग्रामीणों ने इसकी गतिविधियों पर सवाल उठाए तो एसडीओपी दीपा मांडवे टीम के साथ मौके पर पहुंचीं। वेयर हाउस पर ताला लगा था, जिसे तोड़कर टीम अंदर दाखिल हुई। शुरुआती जांच में अधिकारियों ने दावा किया कि यहां सिर्फ पटाखों और अन्य सामान का स्टॉक रखा हुआ है। बाद में कलेक्टर कार्यालय में मीडिया ने वेयर हाउस की गतिविधियों को लेकर सवाल उठाए तो एसपी पुनीत गेहलोद ने कहा कि जांच टीम को वहां कोई संदिग्ध चीज नहीं मिली। उन्होंने कहा कि वहां केवल पैकिंग के कार्टन और पटाखों के पैकेट थे। हालांकि मीडिया के सवालों के बाद एसपी ने तत्काल अधिकारियों को फोन कर वेयर हाउस के अंदर की विस्तृत जांच के निर्देश दिए। पुलिस ने अब तक यह साफ नहीं किया कि जांच में क्या मिला, लेकिन अंदर की तस्वीरें और वीडियो कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। तस्वीर 1- वेयर हाउस में वैसे ही कंटेनर, जिनमें फैक्ट्री में हुआ ब्लास्ट वेयर हाउस में सामान के बीच स्टील के वही कंटेनर छिपाकर रखे गए थे, जिन जैसे कंटेनरों में फैक्ट्री में विस्फोट हुआ था। हादसे के समय मजदूर खाना खा रहे थे, तभी अचानक कंटेनर में धमाका हुआ और 26 मजदूर उसकी चपेट में आ गए। पांच मजदूरों की मौत हो गई, जबकि आठ की हालत गंभीर बनी हुई है। वीडियो में ऐसे चार से छह कंटेनर दिखाई दे रहे हैं। आशंका है कि सामान के पीछे और भी कंटेनर रखे हो सकते हैं। तस्वीर 2- ‘REGULAR’ लिखे कट्टे दोनों जगह मिले विस्फोट वाली फैक्ट्री में सफेद रंग के कट्टे बड़ी संख्या में दिखाई दिए, जिन पर लाल रंग से ‘REGULAR’ लिखा हुआ था। इन कट्टों का उपयोग पटाखों के पैकेट भरने में किया जा रहा था। फैक्ट्री में ऐसे करीब आठ हजार कट्टे बताए जा रहे हैं। इसी तरह के कट्टे वेयर हाउस में भी मिले। वहां उनकी संख्या लाखों में बताई जा रही है और सभी पैक हालत में रखे थे। इन पर भी लाल रंग से ‘REGULAR’ लिखा था। इससे आशंका है कि पटाखे तैयार करने के बाद इन्हें इन्हीं कट्टों में भरकर सप्लाई किया जाता था। तस्वीर 3- गत्तों के नीचे छिपी संदिग्ध बोरियां वेयर हाउस के वीडियो में प्रशासनिक टीम गत्तों को हटाती दिखाई दे रही है। इनके नीचे सफेद रंग की बोरियां छिपाकर रखी गई थीं। जांच टीम को आशंका है कि इनमें पोटाश या अन्य विस्फोटक सामग्री हो सकती है। ऐसी ही बोरियां हादसे वाली फैक्ट्री में भी मिली थीं। बताया जा रहा है कि इन कट्टों में मौजूद केमिकल को अन्य पदार्थों के साथ मिलाकर विस्फोटक तैयार किया जाता था, जिससे पटाखे बनाए जाते हैं। तस्वीर 4- पैकिंग के लिए टेबल-कुर्सियों की व्यवस्था वेयर हाउस के अंदर लंबी टेबल और कुर्सियों की व्यवस्था भी मिली। वीडियो में टेबल पर पटाखों के पैकेट दिखाई दे रहे हैं और पीछे बड़ी संख्या में कार्टन रखे हैं। यहां एक साथ दस से ज्यादा लोग बैठकर काम कर सकते थे। संभावना जताई जा रही है कि हादसे वाली जगह पर पटाखे तैयार कर उन्हें यहां लाया जाता था। इसके बाद यहां पैकिंग कर माल को वाहनों के जरिए बाहर सप्लाई किया जाता था। सरपंच ने पहले ही जताई थी हादसे की आशंका ग्राम पंचायत कलवां की सरपंच कविता गौड़ ने दावा किया कि उन्होंने मार्च 2026 में ही वेयर हाउस में पटाखा निर्माण की शिकायत कई स्तरों पर की थी। 8 मार्च को तहसीलदार को दिए आवेदन में उन्होंने लिखा था कि जयदेव वेयर हाउस में पटाखा फैटरी संचालित हो रही है। सामने पेट्रोल पंप है और आसपास मकान व दुकानें मौजूद हैं, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है। सरपंच के अनुसार 14 मार्च को यहां छोटा विस्फोट भी हुआ था, लेकिन तब भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत लेने तक में आनाकानी की गई। उनका कहना है कि लाइसेंस मिलने से पहले से ही यहां पटाखा बनाने का काम चल रहा था। बाद में काम को पुल के नीचे स्थित स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया, जहां अब बड़ा हादसा हुआ। पंचायत की मंजूरी नहीं, फिर कैसे मिला लाइसेंस? विस्फोटक नियम 2008 के अनुसार पटाखा फैक्ट्री का लाइसेंस जारी करने से पहले ग्राम पंचायत या नगर परिषद का ठहराव जरूरी होता है। लेकिन यहां सरपंच खुद फैक्ट्री का विरोध कर रही थीं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पंचायत की मंजूरी के बिना लाइसेंस कैसे जारी कर दिया गया? पटवारी मनीष पटेल की रिपोर्ट में भी स्पष्ट उल्लेख था कि फैक्ट्री हाईवे किनारे स्थित है, आबादी क्षेत्र करीब 500 मीटर दूर है और पेट्रोल पंप लगभग 700 मीटर की दूरी पर है। इसके बावजूद फैक्ट्री को पटाखा निर्माण की अनुमति दे दी गई।



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