भास्कर न्यूज | खरौंधी महंगाई के इस दौर में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के साथ अब ईंधन की किल्लत ने खरौंधी प्रखंड के लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी खरौंधी प्रखंड में एक भी पेट्रोल पंप स्थापित नहीं हो पाया है। इसका सीधा असर आम जनता, वाहन चालकों, किसानों, व्यापारियों और मरीजों पर पड़ रहा है।प्रखंड क्षेत्र के लोगों को पेट्रोल और डीजल लेने के लिए 20 से 30 किलोमीटर दूर भवनाथपुर या उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों तक जाना पड़ता है। कई बार लोग सुबह से ही ईंधन लेने के लिए निकलते हैं, लेकिन वहां पहुंचने पर पंपों में तेल खत्म होने की जानकारी मिलती है। यदि कहीं तेल उपलब्ध भी रहता है तो घंटों लंबी कतार में खड़ा रहना पड़ता है। इससे लोगों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खरौंधी जैसे बड़े प्रखंड में आज तक एक भी पेट्रोल पंप नहीं खुलना जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उदासीनता को दर्शाता है। लगातार वाहनों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन मूलभूत सुविधाओं का विकास नहीं हो पा रहा है। लोग मजबूरी में अतिरिक्त पैसे खर्च कर दूर-दराज के क्षेत्रों से पेट्रोल और डीजल लाने को विवश हैं। ईंधन संकट का सबसे ज्यादा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। प्रखंड क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से अस्पताल भवन तो बनाए गए, लेकिन डॉक्टरों की कमी और संसाधनों के अभाव में स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल बनी हुई है।गंभीर मरीजों को इलाज के लिए भवनाथपुर, गढ़वा, मेदिनीनगर या वाराणसी ले जाना पड़ता है। ऐसे समय में यदि वाहनों में पेट्रोल या डीजल नहीं रहता तो मरीजों और उनके परिजनों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। कई बार लोगों को निजी वाहन छोड़ बस या अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ता है।वहीं किसानों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है।
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खरौंधी में नहीं खुला एक भी पेट्रोल पंप, बढ़ रही परेशानी










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